South China Sea में China का Drone Fortress प्लान, जानें क्या है रणनीति

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

बीजिंग: South China Sea के विवादित द्वीपों और reefs की सुरक्षा के लिए चीन की एक नई defence proposal सामने आई है। इसमें ऐसे autonomous defence systems की कल्पना की गई है, जहां सैनिकों की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय हवा, समुद्र की सतह और पानी के भीतर काम करने वाले drones का coordinated network बनाया जाए।

यह प्रस्ताव Chinese Coast Guard Academy और Dalian Maritime University से जुड़े शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इसका विवरण जुलाई में प्रकाशित Command Control & Simulation नाम के Chinese weapons industry और military technology journal में सामने आया। प्रस्ताव में द्वीपों और reefs को ऐसे fixed defence nodes के रूप में इस्तेमाल करने की बात है, जिनके चारों तरफ अलग-अलग तरह के uncrewed systems लगातार निगरानी और defensive operations कर सकें।

Ukraine War से लिया गया सबक

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ी चिंता low-cost drone swarms को लेकर है। शोधकर्ताओं ने Ukraine war का उदाहरण देते हुए कहा कि सस्ते uncrewed platforms के बड़े समूह पारंपरिक और महंगे manned military platforms के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

पेपर में Ukraine के Magura V5 maritime strike drone का उल्लेख किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऐसे uncrewed surface vessels ने कम लागत वाले swarm attacks की क्षमता दिखाई है और इससे traditional large manned ships की vulnerability सामने आई है।

शोधकर्ताओं का तर्क है कि जब बड़ी संख्या में drones एक साथ हमला करते हैं तो पारंपरिक defence की linear response chain कमजोर पड़ सकती है। किसी threat को detect करने, उसका आकलन करने और फिर जवाब देने में लगने वाला समय saturation attack की स्थिति में भारी पड़ सकता है।

हवा, पानी और समुद्र की सतह पर drones

चीन के प्रस्ताव में तीनों domains को एक ही defence network में जोड़ने की योजना है। Aerial drones बड़े इलाके की निगरानी करेंगे और आसमान से आने वाले threats की पहचान करेंगे।

Uncrewed surface vehicles समुद्र की सतह के उन हिस्सों पर नजर रखेंगे जहां aerial surveillance की सीमाएं हो सकती हैं। वहीं underwater drones shallow channels और reefs की ढलानों के आसपास निगरानी करेंगे।

इस पूरे network को islands और reefs पर मौजूद fixed nodes से जोड़ने की बात कही गई है। उद्देश्य यह है कि किसी एक surveillance या defence platform के नष्ट होने के बावजूद बाकी system काम करता रहे।

AI संभालेगा ‘Observe, Decide, Act’ सिस्टम

इस प्रस्ताव में अमेरिकी Air Force Colonel John Boyd के OODA loop, यानी Observe, Orient, Decide and Act मॉडल का इस्तेमाल किया गया है।

पारंपरिक military system में ये चरण अपेक्षाकृत linear तरीके से आगे बढ़ते हैं। लेकिन proposed Chinese system में अलग-अलग drones और defence nodes को इस प्रक्रिया में बांटने की बात कही गई है।

पहले चरण में surveillance network संभावित खतरे का पता लगाएगा। इसके बाद अलग-अलग platforms से मिलने वाली जानकारी को जोड़कर threat का assessment किया जाएगा।

खास बात यह है कि शोधकर्ताओं ने individual platforms में AI chips के इस्तेमाल की बात कही है। इससे communication network बाधित होने की स्थिति में भी drones स्थानीय परिस्थितियों का विश्लेषण करके कुछ निर्णय खुद लेने में सक्षम हो सकते हैं।

यानी पूरा defence network किसी एक central command link पर निर्भर रहने के बजाय distributed architecture पर काम करेगा।

तीन घेरों में बनेगा ‘Drone Fortress’

प्रस्ताव में किसी island या reef के आसपास तीन defensive rings बनाने की बात कही गई है।

सबसे बाहरी ring में reconnaissance और strike वाले aerial drones तथा high-speed surface drones होंगे। पेपर के मुताबिक, ये आने वाले threats पर missiles या torpedoes से हमला कर सकते हैं।

इसके बाद middle ring में electronic warfare का इस्तेमाल होगा। Uncrewed surface vehicles और aerial drones के जरिए विरोधी की communication और decision-making क्षमता को बाधित करने की रणनीति प्रस्तावित की गई है।

अगर कोई threat इन दोनों layers को पार करके inner ring तक पहुंचता है तो वहां close-in defence के लिए uncrewed surface vehicles, suicide drones और underwater vehicles का इस्तेमाल प्रस्तावित है।

इस तरह पूरी व्यवस्था एक layered defence system की तरह काम करेगी, जिसमें एक layer के विफल होने पर अगली layer सक्रिय हो सके।

Communication टूटे तो भी system चलता रहे

इस योजना की एक अहम विशेषता इसकी resilience है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कुछ defence nodes नष्ट हो जाएं या communication links बाधित हो जाएं, तब भी बाकी uncrewed assets अपनी defensive क्षमता बनाए रख सकें।

इसका मतलब है कि proposed system का मकसद केवल drones की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें एक ऐसे network में जोड़ना है जो battlefield damage के बाद भी काम करता रहे।

South China Sea जैसे इलाके में यह रणनीति खास तौर पर islands और reefs की भौगोलिक सीमाओं को ध्यान में रखती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, संकरे passages और सीमित deployment space पारंपरिक सैनिक-आधारित defence में surveillance gaps पैदा कर सकते हैं।

चीन अब किन तकनीकों पर जोर दे रहा है?

पेपर के लेखकों ने आगे real-world marine environments में land, sea और air-based uncrewed swarms के संयुक्त परीक्षण की जरूरत बताई है। इसके साथ cross-domain communication, AI-based decision-making और energy security में सुधार की सिफारिश की गई है।

उन्होंने military-civilian integration को भी आगे बढ़ाने की बात कही है, ताकि uncrewed capabilities के जरिए चीन अपने islands और reefs की सुरक्षा और sovereignty की रक्षा कर सके।

यह प्रस्ताव अभी एक defence research paper में रखी गई रणनीतिक और तकनीकी अवधारणा है। इसमें जिस स्तर के integrated autonomous system की कल्पना की गई है, उसका वास्तविक deployment कितना व्यापक है, यह अलग सवाल है। लेकिन पेपर यह जरूर दिखाता है कि चीन South China Sea में भविष्य के maritime conflict को केवल warships और सैनिकों के जरिए नहीं, बल्कि interconnected drones, AI और distributed defence networks के जरिए देखने की तैयारी कर रहा है।