कान्स में छाई ‘La Bola Negra’, आखिर क्या है लोर्का के अधूरे नाटक की कहानी?

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

हाल ही में प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में ‘बेस्ट डायरेक्टर’ का पुरस्कार जीतकर सुर्खियों में आई फिल्म ‘La Bola Negra’ (ला बोला नेग्रा) अपनी अद्भुत कहानी को लेकर चर्चा में है। जेवियर एम्ब्रोसी और जेवियर कैल्वो (लॉस जाविस) के निर्देशन में बनी यह फिल्म कोई साधारण ड्रामा नहीं है। यह स्पेनिश गृहयुद्ध की विभीषिका, 80 वर्षों के इतिहास और 20वीं सदी के एक प्रसिद्ध अधूरे नाटक का एक शानदार सिनेमाई विस्तार है।

लोर्का का वह अधूरा नाटक, जो फिल्म का आधार बना

इस फिल्म की कहानी और शीर्षक की जड़ें स्पेनिश कवि और नाटककार फेडेरिको गार्सिया लोर्का (Federico Garcia Lorca) के एक अधूरे नाटक से जुड़ी हैं। लोर्का ने 1936 में महज 38 साल की उम्र में अपनी मृत्यु से ठीक पहले इस नाटक को लिखना शुरू किया था। यह उनका पहला काम था जिसमें मुख्य किरदार स्पष्ट रूप से समलैंगिक था।

लोर्का के उस बचे हुए अंश में बताया गया है कि कैसे एक युवा और अमीर व्यक्ति को उसकी कामुकता के कारण एक प्रतिष्ठित ग्रेनाडा कैसीनो से निकाल दिया जाता है। कैसीनो का बोर्ड मतदान के लिए सफेद और काली (Black) गेंदों का इस्तेमाल करता है, और उस युवक को सचमुच ‘ब्लैकबॉल’ (Blackballed) कर दिया जाता है।

फिल्म इसी प्रसंग से शुरू होती है। पर्दे पर कार्लोस (मिलो क्विफ्स) नाम का किरदार 1932 में ठीक इसी स्थिति का सामना करता है। कैसीनो द्वारा ठुकराए जाने के बाद, उसे अपने परिवार से अलग-अलग और परस्पर विरोधी सलाह मिलती है।

स्पेनिश गृहयुद्ध की खौफनाक पृष्ठभूमि

लोर्का के इस अधूरे काम को निर्देशकों ने अपनी कल्पना से विस्तार दिया है और इसे दो अन्य कहानियों के साथ जोड़ा है। इनमें से सबसे प्रमुख कहानी 1937 के स्पेनिश गृहयुद्ध (Spanish civil war) के दौरान सेट की गई है।

यह कहानी गांव के एक ट्रम्पेट बजाने वाले सेबस्टियन (सिंगर-सॉन्गराइटर Guitarricadelafuente) की है। इटली की सेना के एक हमले में उसका पूरा परिवार मारा जाता है, और वह किसी तरह अपनी जान बचाता है। लेकिन उसकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं; उसे जबरन ‘राष्ट्रवादियों’ (Nationalists) की सेना में शामिल कर लिया जाता है।

सेबस्टियन को एक घायल रिपब्लिकन अधिकारी राफेल (मिगुएल बर्नार्ड्यू) की पहरेदारी का काम मिलता है। यहीं से इन दोनों के बीच युद्ध की क्रूरता के बीच एक नाजुक रिश्ता पनपने लगता है। दिलचस्प बात यह है कि यह प्रेम कहानी वास्तविक जीवन के फुटबॉलर राफेल रोड्रिगेज रापुन (Rafael Rodriguez Rapun) से प्रेरित है और यह हिस्सा अल्बर्टो कोनेजेरो के नाटक ‘ला पिड्रा ओस्कुरा’ से लिया गया है।

2017: एक इतिहासकार की खोज

फिल्म की तीसरी कड़ी आधुनिक समय, यानी 2017 में घटती है। अल्बर्टो (कार्लोस गोंजालेज) एक इतिहासकार और संघर्षरत नाटककार है। उसे पता चलता है कि उसके नाना (maternal grandfather) ने अपनी वसीयत में उसके लिए कुछ छोड़ा है। अपनी मां (लोला डुएनास) की लाख मनाही के बावजूद, अल्बर्टो अपनी विरासत हासिल करने के लिए स्पेन के ग्रामीण इलाके की यात्रा पर निकल पड़ता है, जहां से अतीत के कई रहस्य खुलते हैं।

तीनों कहानियों को एक साथ पिरोते हुए, ‘La Bola Negra’ न केवल युद्ध की त्रासदी को दिखाती है, बल्कि प्यार, पहचान और 80 सालों के लंबे सफर की एक भव्य सिनेमाई दास्तान भी पेश करती है।