शेजवान से मंचूरियन तक, कैसे भारतीयों के स्वाद ने बदल दिया चाइनीज खाना?

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

भारत में स्ट्रीट स्टॉल से लेकर बड़े रेस्तरां के मेन्यू तक, शेजवान (Szechwan) और मंचूरियन सॉस वाले व्यंजन अपनी एक खास जगह बना चुके हैं। नाम से भले ही ये चीन के लगें, लेकिन असल में इनकी कहानी पूरी तरह से ‘लोकल’ है।

‘चिंडियन’ (Chindian) या इंडो-चाइनीज कुजीन के नाम से मशहूर यह खानपान शैली कोलकाता में रहने वाले चीनी प्रवासी समुदायों के बीच विकसित हुई। वहां के कुक ने अपने पारंपरिक व्यंजनों को स्थानीय सामग्री और स्वाद के हिसाब से ढाला, जिसमें सोया सॉस और सिरके के साथ-साथ मिर्च, अदरक और लहसुन का जमकर इस्तेमाल किया गया। यह सिर्फ चीनी खाने का विकल्प नहीं बना, बल्कि इसने अपनी एक अलग और स्वतंत्र पहचान कायम कर ली।

सिचुआन और ‘शेजवान’ में अंतर

भारत में शेजवान डिशेज का स्वाद चीन के सिचुआन (Sichuan) प्रांत के पारंपरिक खाने से काफी अलग है। मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में स्थित ‘चाइना हाउस’ के सिचुआन मूल के शेफ झांग याजुन (Zhang Yajun) बताते हैं, “भारतीय कुकिंग में खुशबू लाने के लिए मसालों का इस्तेमाल होता है और सिचुआन कुकिंग में भी।”

शेफ झांग के मुताबिक, भारतीय लोग मिर्च का तीखापन तो पसंद करते हैं, लेकिन सिचुआन पेपरकॉर्न (एक खास चीनी मसाला) से जीभ पर होने वाली झनझनाहट उन्हें रास नहीं आती। इसलिए, वे अक्सर इसका इस्तेमाल कम कर देते हैं। एक और बड़ा अंतर यह है कि इंडो-चाइनीज डिशेज में गाढ़ी सॉस का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है, क्योंकि भारतीय इसे चावल के साथ मिलाकर खाना पसंद करते हैं।

चिकन शेजवान और मंचूरियन की कहानी

भारत में मिलने वाले ‘शेजवान चिकन’ में सिचुआन पेपरकॉर्न का इस्तेमाल नहीं होता। इसकी लाल रंग की तीखी सॉस भारतीय सूखी लाल मिर्च के पेस्ट, सिरके और कभी-कभी केचप से तैयार की जाती है। क्रिस्पी चिकन के साथ इस खट्टी-तीखी सॉस का तालमेल इसे चावल के साथ खाने के लिए बेहतरीन बनाता है।

वहीं, ‘मंचूरियन सॉस’ का इतिहास चीन के मंचूरिया से नहीं, बल्कि मुंबई से जुड़ा है। इसका श्रेय कोलकाता में जन्मे चीनी शेफ नेल्सन वांग को दिया जाता है, जिन्होंने 1970 के दशक में मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में काम करते हुए ‘चिकन मंचूरियन’ ईजाद किया था। इसकी गाढ़ी सॉस में अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, सोया सॉस और स्टार्च का मिश्रण होता है।

वेज मंचूरियन और ‘देसी’ हॉटपॉट

वेज मंचूरियन में कटी या कद्दूकस की गई सब्जियों में आटा और स्टार्च मिलाकर बॉल्स बनाए जाते हैं और फिर उन्हें मंचूरियन सॉस के साथ परोसा जाता है। शेफ झांग का वर्जन भी काफी लोकप्रिय है, जिसमें सोया सॉस की उमामी (umami) और काली मिर्च के तीखेपन का मिश्रण होता है।

अपनी एक खास डिश ‘लैम्ब शंक हॉटपॉट’ के बारे में शेफ झांग बताते हैं कि इसे पारंपरिक उबलते बर्तन के बजाय स्टोन पॉट में परोसा जाता है। चिली ऑयल से भरपूर, इसकी सॉस भारतीय करी जैसी गाढ़ी और फ्लेवरफुल होती है, जिसमें मांस हड्डी से आसानी से अलग हो जाता है। इसके साथ खाने के लिए चीनी ‘फ्लावर बन’ (mantou) भी परोसा जाता है, जो इस इंडो-चाइनीज फ्यूजन को पूरा करता है।