कैसी है कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की ‘अक्का’, क्या इसे देखना चाहिए?

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अजमल शाह
अजमल शाह

कास्ट: कीर्ति सुरेश, राधिका आप्टे, तन्वी आजमी, अंशुमान पुष्कर, महेश मांजरेकर, मोनिका पंवार

डायरेक्टर: धर्मराज शेट्टी

जॉनर: हिंदी, क्राइम, थ्रिलर

क्रिटिक रेटिंग: 2/5

आम धारणा है कि यदि सत्ता की बागडोर महिलाओं के हाथ में हो, तो समाज बेहतर हो सकता है, क्योंकि महिलाओं में दया और करुणा जैसे भाव जन्मजात माने जाते हैं। ‘नेटफ्ल‍िक्‍स’ की नई क्राइम-थ्र‍िलर वेब सीरीज ‘अक्का’ (Akka) की नींव शायद इसी सोच पर रखी गई थी। कहानी एक काल्पनिक राज्य ‘पेरनुरु’ की है, जो मातृसत्ता से संचालित होता है। लेकिन यह शिक्षित और समृद्ध राज्य अचानक सोने की तस्करी और अपराध का अड्डा कैसे बन गया, यही सीरीज का मुख्य प्लॉट है। हालांकि, दमदार कॉन्सेप्ट के बावजूद सीरीज कई मोर्चों पर निराश करती है।

‘अक्‍का’ की कहानी

कहानी पेरनुरु राज्य की है, जहां शासन बहनें चलाती हैं और गद्दी पर बैठने वाली मुखिया को ‘अक्का’ कहा जाता है। यहां उत्तराधिकारी भी बेटियां ही बनती हैं। मौजूदा अक्का मुतक्का (तन्वी आजमी) की बेटी भवानी (कीर्ति सुरेश) कारोबार की बागडोर संभाल रही है। इसी बीच, मुंबई के स्मगलर शंकर अन्ना (महेश मांजरेकर) की करीबी रुद्रा (राधिका आप्टे) पेरनुरु में तस्करी का माल उतारने के बहाने दाखिल होती है। लेकिन रुद्रा का असली मकसद पेरनुरु में बहनों का शासन खत्म करना और मुतक्का को बर्बाद करना है। वह ऐसा क्यों करना चाहती है और क्या वह कामयाब हो पाती है? यही इस सीरीज की कहानी है।

कैसा है ‘अक्का’ का निर्देशन और स्क्रीनप्ले?

डायरेक्टर धर्मराज शेट्टी ने एक रोचक दुनिया रचने की कोशिश की है। कल्पनाशीलता के स्तर पर पेरनुरु को ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ की तर्ज पर परप्लाडी, हेरकड़ा और मलेबार घरानों में बांटा गया है। अक्का के लिए नियम भी दिलचस्प हैं, जैसे वह शादी नहीं कर सकती, लेकिन उसका एक बेटी की मां होना अनिवार्य है।

लेकिन, स्क्रीनप्ले इस दिलचस्प कॉन्सेप्ट के साथ न्याय नहीं कर पाता। रुद्रा का चुटकी बजाते ही 800 साल तक राज करने वाली मजबूत महिलाओं के साम्राज्य को हिला देना विश्वसनीय नहीं लगता। एक सुनार की हत्या से पूरा सोने का कारोबार ठप हो जाना और भवानी को बिना किसी विरोध के हथकड़ी लगाकर ले जाना जैसे घटनाक्रम सीरीज की पकड़ कमजोर कर देते हैं।

किरदारों की कमी और अभिनय

मुतक्का और भवानी के किरदारों में वह बहादुरी और बुद्धिमत्ता नजर नहीं आती, जो दर्शकों के मन में उनके प्रति सम्मान पैदा कर सके। वहीं, रुद्रा के किरदार में परतें तो हैं, लेकिन उसे काफी हद तक रूढ़िवादी थ्रिलर के खांचे में समेट दिया गया है।

अभिनय की बात करें तो साड़ी और गहनों में सजी कीर्ति सुरेश सीरीज की जान हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और शानदार अभिनय ‘अक्का’ का सबसे मजबूत पक्ष है। राधिका आप्टे प्रभाव छोड़ती हैं, लेकिन कई संवादों में वह गहराई नदारद दिखती है। दोनों के आमने-सामने वाले दृश्य जरूर असरदार हैं। तन्वी आजमी अपने अनुभव से मजबूती देती हैं और युवा मुतक्का के रूप में मोनिका पंवार का काम भी सराहनीय है।

क्यों देखें?

शानदार कॉस्ट्यूम, भव्य सेटअप और दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद ‘अक्का’ का कमजोर स्क्रीनप्ले इसे एक साधारण रिवेंज ड्रामा बनाकर छोड़ देता है। अगर आप कीर्ति सुरेश के फैन हैं और उन्हें एक दमदार और अलहदा अवतार में देखना चाहते हैं, तो यह सीरीज आजमा सकते हैं।