कहीं हंसी, कहीं भावुक पल, क्या दिल जीतती है ‘Meethe Mein Kya Hai’?

कास्ट: रोहिणी हट्टंगड़ी, ऋत्विक भौमिक, आयशा रजा, तराना राजा, विक्रम बख्शी, दलाई, शिविका ऋषि, कनिका कपूर
डायरेक्टर: राधिका बंसल
जॉनर: हिंदी, फैमिली, ड्रामा
अवधि: 1 घंटा 59 मिनट
क्रिटिक रेटिंग: 3/5
कहावत है कि सुख-दुख में परिवार और अपने ही साथ देते हैं। लेखिका और निर्देशिका राधिका बंसल की डेब्यू फिल्म ‘मीठे में क्या है’ इसी एहसास को पुख्ता करती है। दिवाली के त्योहार को केंद्र में रखकर बुनी गई यह हल्की-फुल्की फिल्म खोने के दर्द, अपनों के साथ और परिवार की अहमियत पर जोर देती है।
‘मीठे में क्या है’ की कहानी
फिल्म की कहानी जय (ऋत्विक भौमिक) और उसकी हंसती-खेलती फैमिली के इर्द-गिर्द घूमती है। जय दो साल पहले गुजर चुकी अपनी पत्नी तारा (कनिका कपूर) को खोने के गम से उबर नहीं पा रहा है। वह सब कुछ बेचकर विदेश में बसने की तैयारी कर रहा है। लेकिन तभी कहानी में एक नया मोड़ आता है, जब उसकी बहन सना (दलाई) बिना किसी को बताए करम (विक्रम बख्शी) से शादी कर लेती है।
इस वजह से जय को दिवाली पर अपनी नानी (रोहिणी हट्टंगड़ी) के घर लखनऊ आना पड़ता है, जहां पूरा परिवार इकट्ठा है। दिवाली का त्योहार, परिवार का री-यूनियन और सना की शादी का सरप्राइज—पूरा घर इस पर कैसे रिएक्ट करता है? और क्या जय इन सबके बीच अपने दर्द से उबर पाता है? यही इस पारिवारिक फिल्म का मुख्य ताना-बाना है।
कैसा है फिल्म का निर्देशन?
राधिका बंसल ने एक ‘फील गुड’ पारिवारिक फिल्म से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा है। फिल्म देखते हुए दर्शकों को अपने मामा-मामी, नानी-दादी, बुआ-फूफा और कजिन्स के साथ बिताए पल जरूर याद आ जाएंगे। उन्होंने किरदारों और उनके आपसी रिश्तों को हल्के-फुल्के ढंग से दिखाया है और इसे ज्यादा नाटकीय बनाने से परहेज किया है। उदाहरण के लिए, सना के एक शादीशुदा और बच्ची के पिता करम से शादी करने पर भी उसकी मां अमृता (आयशा रजा) को छोड़कर बाकी परिवार काफी सहज नजर आता है।
स्क्रीनप्ले में है कसावट की गुंजाइश
हालांकि, फिल्म के स्क्रीनप्ले में थोड़ी और कसावट की गुंजाइश थी। जय और उसकी नानी के रिश्ते को थोड़ा और विस्तार दिया जाता और उनके बीच कुछ गहरे भावनात्मक दृश्य बुने जाते, तो कहानी का असर और बढ़ सकता था। इसी तरह, कुछ और मजेदार या दिल छू लेने वाले पल फिल्म को ज्यादा यादगार बना सकते थे। हालांकि, जय और मीरा (शिविका ऋषि) के बीच के सीन कहानी में खूबसूरत भावनात्मक रंग भरते हैं।
कलाकारों का शानदार अभिनय
इस परिवार को ‘अपना सा’ बनाने में इसके कलाकारों का भी बड़ा हाथ है। अनुभवी अभिनेत्री रोहिणी हट्टंगड़ी के साथ-साथ आयशा रजा, तराना राजा, शिविका, विक्रम बख्शी, ऋत्विक भौमिक और दलाई—सभी ने अपने किरदारों को बड़ी खूबसूरती और सहजता से निभाया है। इनके अभिनय की वजह से ये सब सिर्फ फिल्म के किरदार नहीं, बल्कि वाकई एक असल परिवार का हिस्सा लगते हैं।
क्यों देखें?
कुल मिलाकर, ‘मीठे में क्या है’ कोई बहुत गहरी या चौंकाने वाली कहानी नहीं कहती, लेकिन रिश्तों की गर्माहट और त्योहार के उल्लास से मन को हल्का जरूर करती है। कुछ भावनात्मक और मनोरंजक पलों की कमी खलती है, मगर दिवाली के मौके पर परिवार के साथ देखने के लिए यह एक प्यारी-सी टाइमपास फिल्म साबित हो सकती है। हल्के-फुल्के और खुशनुमा एहसास के लिए आप इसे नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं।

