BJP-अकाली दल की जोड़ी फिर चर्चा में है और 35-45 सीटों का फॉर्मूला भी

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच फिर से साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति लगभग बन चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा अंतिम दौर में है और जल्द ही इस गठबंधन की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला

सूत्रों की मानें तो राज्य की कुल 117 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 35 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बाकी सीटें अकाली दल और कुछ अन्य छोटे सहयोगी दलों के खाते में जाएंगी।

अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अलग-अलग चुनाव लड़कर दोनों पार्टियों ने अपना नुकसान देख लिया है, इसलिए अब फिर से साथ आने पर विचार हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस गठबंधन की घोषणा में जितनी देरी होगी, इसे जमीन पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण होगा।

अकाली दल रहेगा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में

सूत्रों के अनुसार, यह लगभग तय है कि पंजाब में गठबंधन के भीतर शिरोमणि अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रहेगा। यदि गठबंधन सत्ता में आता है, तो मुख्यमंत्री पद पर भी अकाली दल का ही मजबूत दावा होगा। इसके अलावा, अकाली दल पार्टी से नाराज होकर अलग हुए पुराने नेताओं को वापस लाने के प्रयासों में भी जुटा है।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार बनने का दावा किया था, जिससे गठबंधन की संभावनाओं को और बल मिला है। बीजेपी के आंतरिक सर्वे के मुताबिक, अगर दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो वे 117 में से 80 से अधिक सीटें जीत सकते हैं।

वोट शेयर का गणित: दोनों दल साथ आए तो क्या होगा?

बीजेपी नेताओं का मानना है कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़े गवाही देते हैं कि दोनों दल अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत हैं:

  • 2024 लोकसभा चुनाव: अकाली दल को करीब 13.42% (18 लाख) और बीजेपी को 18.56% (25 लाख) वोट मिले। दोनों के वोट मिलाकर यह आंकड़ा 43 लाख (करीब 32%) तक पहुंच जाता है। इस चुनाव में बीजेपी 45 विधानसभा सीटों पर अकाली दल से आगे रही थी।

  • 2022 विधानसभा चुनाव: अकाली दल को 18.38% (28.61 लाख) और बीजेपी व उसके सहयोगियों को 8% (12 लाख) वोट मिले थे। दोनों के वोट मिलाकर यह आंकड़ा करीब 41 लाख बैठता है।

इसकी तुलना में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को 42% (65.38 लाख) वोट मिले थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 26.30% (35.43 लाख) रह गए। वहीं कांग्रेस को 2024 में 26.02% वोट मिले। आंकड़ों के अनुसार, अगर त्रिकोणीय मुकाबला होता है, तो बीजेपी-अकाली गठबंधन मजबूत स्थिति में रहेगा।

सीटों की अदला-बदली पर पेंच

1996 से 2020 तक अकाली दल और बीजेपी गठबंधन में रहे। उस दौरान बीजेपी 117 में से केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर बीजेपी इस बार अधिक सीटों की मांग कर रही है।

अमूमन बीजेपी शहरी क्षेत्रों और अकाली दल ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ता आया है। हालांकि, इस बार अकाली दल उन ‘सेमी-अर्बन’ (अर्ध-शहरी) सीटों पर भी चुनाव लड़ने की योजना बना रहा है, जहां बीजेपी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में उम्मीदवारों और सीटों की अदला-बदली को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बननी अभी बाकी है।