जानिए, बिना अनुमति मार्च और ‘जन संसद’ की तैयारी के पीछे क्या है पूरा मामला

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

दिल्ली में 23 अक्टूबर को चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ (People Against SIR) समूह की ओर से बुलाए गए इस मार्च का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाना और वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया को वापस लेना है। इस प्रदर्शन में किसान नेता, अर्थशास्त्री, वकील और छात्र नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

बिना पुलिस अनुमति के मार्च का ऐलान और ‘जन संसद’ की तैयारी

छात्रों, किसानों और नागरिक समाज संगठनों के इस समूह ने स्पष्ट किया है कि वे इस विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से कोई अनुमति नहीं लेंगे। प्रदर्शनकारियों की योजना कनॉट प्लेस के बंगला साहिब गुरुद्वारे से पटेल चौक स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने की है।

आयोजकों ने बताया कि अगर पुलिस उन्हें रास्ते में रोकती है, तो वे उसी जगह ‘जन संसद’ (पीपल्स पार्लियामेंट) का आयोजन करेंगे और राष्ट्रगान गाकर वहां से चले जाएंगे। इस अभियान को ‘हर गली जंतर-मंतर, हर गांव जंतर-मंतर, मेरा घर जंतर-मंतर’ का नारा दिया गया है। नई दिल्ली जिले में वर्तमान में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति के सार्वजनिक सभाओं और प्रदर्शनों पर रोक है।

चुनाव आयोग और SIR को लेकर क्या हैं मांगें?

14 अक्टूबर को बनाए गए इस समूह ने मतदाता सूची के संशोधन (electoral revision) की पूरी प्रक्रिया को गैर-कानूनी करार दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वोटर लिस्ट को 2024 से पहले की स्थिति में बहाल किया जाए और इसके बाद ‘सोशल ऑडिट’ के जरिए इसे अपडेट किया जाए।

समूह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उन पर मुकदमा चलाने की मांग रखी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग को मिली लीगल इम्युनिटी (कानूनी छूट) को वापस लेने की भी वकालत की गई है।

प्रदर्शन में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरे

इस विरोध मार्च के लिए कई जाने-माने चेहरों को न्योता भेजा गया है। इनमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके, छात्र नेता नेहा बोरा और आइशी घोष के साथ वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल हैं। अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर, अभिनेता प्रकाश राज, किसान नेता राकेश टिकैत और लेखक तुषार गांधी को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजकों ने दिल्ली के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है।

पिछली कार्रवाइयां और बीजेपी का रुख

इस मार्च से पहले भी ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई हो चुकी है। 10 अक्टूबर को हुए पिछले विरोध प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके, CJP के अन्य सदस्य सौरभ दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया गया था। नेहा बोरा, आइशी घोष और प्रशांत भूषण को भी हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले ही एसआईआर प्रक्रिया पर लग रहे इन तमाम आरोपों को खारिज कर चुके हैं। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इन प्रदर्शनकारियों को ‘अराजक तत्व’ करार दिया था। 23 अक्टूबर के इस प्रस्तावित मार्च पर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।