प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले थे, हुआ दर्दनाक हादसा! करंट से दो की मौत

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। मझौली थाना क्षेत्र में सिविल लाइन पाथ से नारेली तालाब की ओर जा रहे विसर्जन जुलूस में शामिल लोग अचानक करंट की चपेट में आ गए। यह हादसा उस समय हुआ जब प्रतिमा के साथ चल रहा लोहे का ट्रस (ढांचा) बिजली के तारों के संपर्क में आ गया। इस घटना में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु झुलस गए हैं।

रात एक बजे हुआ हादसा, टूटकर गिरा बिजली का तार

जानकारी के अनुसार, मझौली थाना क्षेत्र के सिविल लाइन पाथ से दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए 50 से अधिक श्रद्धालु नारेली तालाब जा रहे थे। यह प्रतिमा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रखी गई थी और उसके साथ लोहे का ट्रस भी लगाया गया था।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रास्ते में एक नीचा बिजली का तार आने पर लोगों ने उसे ऊपर उठाने का प्रयास किया। इसी दौरान उस तार का संपर्क ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से हो गया। इसके बाद तार टूटकर सीधा ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गिर गया और आसपास मौजूद लोग करंट की चपेट में आ गए।

दो युवकों की मौके पर मौत, मची भगदड़

इस दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय विकास राजपूत और 23 वर्षीय प्रिंस चौहान की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय दोनों युवक ट्रैक्टर पर ही बैठे हुए थे। जुलूस में शामिल लोगों ने बताया कि करंट फैलते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

मेडिकल कॉलेज में चल रहा घायलों का इलाज

हादसे में पांच से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों में मयंक राजपूत, विक्की रैकवार, मनीष राजपूत और आयुष रैकवार सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हैं। सभी घायलों को पहले मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है।

बिजली विभाग पर उठे सवाल

जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना रात करीब एक बजे हुई। पुलिस के मुताबिक घायलों की हालत में सुधार है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

वहीं, इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि इलाके में झूलते बिजली तारों की समस्या पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विसर्जन से पहले हुई बैठक में बिजली विभाग को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुट गया है कि इस मामले में बिजली विभाग या अन्य एजेंसियों की ओर से कोई लापरवाही हुई थी या नहीं।