अंकिता को न्याय दिलाने की मांग तेज, इंडिया गेट पहुंचे राहुल-प्रियंका गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार देर शाम इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग को लेकर इंडिया गेट पर धरने पर बैठे हुए हैं। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। राहुल गांधी ने इससे पहले अगस्त 2026 में भी अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था।
क्या है अंकिता भंडारी मर्डर केस?
उत्तराखंड के इतिहास के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शुमार अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 का है। पौड़ी-गढ़वाल स्थित एक रिजॉर्ट में 19 साल की अंकिता रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं।
उन्होंने 28 अगस्त 2022 को ऋषिकेश के पास गंगा-भोगपुर स्थित वनतारा रिजॉर्ट में नौकरी ज्वाइन की थी। लेकिन 18 सितंबर 2022 को वह अचानक रिजॉर्ट से लापता हो गईं। शुरुआत में रिजॉर्ट के मालिक ने खुद को बचाने के लिए पुलिस थाने में एक फर्जी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की थी।
पुलिस और एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ कि हत्या से ठीक पहले अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले एक खास ‘VIP’ को स्पेशल सर्विस देने का भारी दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता द्वारा इस बात का कड़ा विरोध किए जाने पर उनकी हत्या कर दी गई।
आरोपियों की गिरफ्तारी और सजा
जांच के बाद 23 सितंबर 2022 को पुलिस ने रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता को चिल्ला नहर में धक्का दे दिया था। इसके बाद 24 सितंबर को पुलिस ने नहर से अंकिता का शव बरामद कर लिया था।
दिसंबर 2022 में एसआईटी ने तीनों आरोपियों के खिलाफ करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 47 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक सबूत शामिल थे। इस मामले में कड़ा कदम उठाते हुए प्रशासन ने वनतारा रिजॉर्ट के कुछ हिस्सों पर बुलडोजर भी चला दिया था, हालांकि परिजनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह कार्रवाई मुख्य आरोपियों और VIP से जुड़े सबूत मिटाने के लिए की गई थी।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, 30 मई 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद जून 2026 में दोषियों ने सजा के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां अदालत ने उनकी अंतरिम राहत और जमानत की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।

