2022 में बराबरी, 2027 में किसकी बारी? बाराबंकी की छह सीटों पर नजर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटा बाराबंकी जिला राज्य की उन चुनिंदा सीटों में शुमार है, जहां के चुनावी नतीजे हमेशा से कांटे के रहे हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) ने तीन-तीन सीटों पर जीत दर्ज कर बराबरी का मुकाबला किया था। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां का राजनीतिक समीकरण बदलता नजर आ रहा है। अब लड़ाई सिर्फ बीजेपी बनाम विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी खेमे के भीतर ही सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
2022 में बीजेपी और सपा का बराबर रहा था प्रदर्शन
पिछले विधानसभा चुनाव में बाराबंकी की छह सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और करीबी रहा था। कुर्सी सीट पर बीजेपी के सकेंद्र प्रताप वर्मा ने सपा के राकेश कुमार वर्मा को महज 217 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था। वहीं, रामनगर सीट पर सपा के फरीद महफूज किदवई ने बीजेपी के शरद अवस्थी को 261 वोटों से शिकस्त दी थी।
इसके अलावा बाराबंकी (सदर) सीट से सपा के धर्मराज सिंह यादव ने जीत हासिल की थी, जहां वे लगातार तीन बार से विधायक हैं। जैदपुर (सुरक्षित) सीट पर सपा के गौरव रावत जीते, जबकि दरियाबाद और हैदरगढ़ (सुरक्षित) सीटें बीजेपी के खाते में गईं थीं। दरियाबाद सीट पर बीजेपी के सतीश चंद्र शर्मा ने सपा के अरविंद सिंह गोप को मात दी थी।
लोकसभा चुनाव के बाद गरमाया 2027 का समीकरण
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी संसदीय सीट पर कांग्रेस के तनुज पुनिया ने जीत दर्ज की थी, जो ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत सपा के समर्थन से मैदान में उतरे थे। इस जीत के बाद से जिले में कांग्रेस का उत्साह बढ़ा है।
वर्तमान में 2027 के सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच अंदरखाने मंथन और रस्साकशी चल रही है। जहां समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी सीटों और मजबूत पकड़ का हवाला देते हुए सभी छह सीटों पर अपनी तैयारी पुख्ता कर रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी जिले में कम से कम तीन सीटों की मांग पर अड़ी हुई है। स्थानीय स्तर पर सांसद तनुज पुनिया के रुख को देखते हुए यह जिला गठबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी दरियाबाद और हैदरगढ़ जैसी अपनी पारंपरिक और मजबूत सीटों को बचाने के साथ-साथ कुर्सी सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
जातीय समीकरणों पर टिकी सभी दलों की नजरें
बाराबंकी जिले के राजनीतिक ताने-बाने में जातीय समीकरण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं:
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कुर्सी सीट: यहां कुर्मी मतदाता सबसे बड़ा राजनीतिक समूह हैं, इसके साथ ही मुस्लिम, यादव, ठाकुर और दलित मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं।
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रामनगर सीट: इस क्षेत्र में मुस्लिम, यादव और कुर्मी मतदाताओं के साथ सवर्ण वोटर्स भी हार-जीत तय करते हैं। यहां किदवई परिवार का पारंपरिक प्रभाव माना जाता है।
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बाराबंकी (सदर) सीट: स्थानीय अनुमानों के अनुसार यहां यादव मतदाता सबसे बड़े समूह के रूप में हैं, जबकि मुस्लिम और कुर्मी आबादी भी अच्छी खासी संख्या में है।
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जैदपुर (सुरक्षित) सीट: इस आरक्षित सीट पर मुस्लिम, वर्मा (कुर्मी) और रावत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, साथ ही यादव और ब्राह्मण वर्ग के वोट भी असर डालते हैं।
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दरियाबाद सीट: यहां ब्राह्मण, कुर्मी, यादव और दलित मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव है।
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हैदरगढ़ (सुरक्षित) सीट: इस सीट पर रावत समाज का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है, जिसके बाद वर्मा, यादव, ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता आते हैं।

