कांगो की सत्ता पर संघर्ष तेज? कबीला और विद्रोही नेताओं ने मिलाया हाथ

Joseph Kabila
अजमल शाह
अजमल शाह

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्व राष्ट्रपति जोसेफ कबीला ने रवांडा समर्थित M23 सशस्त्र समूह के साथ एक नए राजनीतिक-सैन्य आंदोलन का नेतृत्व करने का ऐलान किया है। देश के पूर्वी हिस्से में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच इस घोषणा ने कांगो की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

गोमा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ऐलान

इस नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा पूर्वी कांगो के प्रमुख शहर गोमा स्थित जोसेफ कबीला के आवास पर एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। गौरतलब है कि खनिज संसाधनों से संपन्न पूर्वी कांगो के बड़े हिस्से पर M23 का प्रभाव है और जनवरी 2025 से ही गोमा शहर इस सशस्त्र समूह के नियंत्रण में है।

55 वर्षीय जोसेफ कबीला ने 2001 से 2019 तक कांगो पर शासन किया था। कांगो के अधिकारियों का आरोप है कि कबीला ‘कांगो रिवर एलायंस’ (AFC) के संस्थापकों में से एक हैं। AFC दरअसल M23 का राजनीतिक विंग था, जिसे अब भंग कर दिया गया है।

कबीला को सुनाई जा चुकी है मौत की सजा

कबीला और M23 के बीच यह गठजोड़ कांगो सरकार के लिए बड़ा झटका है। करीब एक साल पहले ही जोसेफ कबीला को रवांडा समर्थित M23 गुट के साथ ‘मिलीभगत’ के आरोप में गैरहाजिरी (in absentia) में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस नए गठबंधन के बाद सरकारी सुरक्षा बलों और विद्रोही गुटों के बीच चल रहे सैन्य टकराव के और गहराने की आशंका है।

2028 में खत्म हो रहा राष्ट्रपति त्शिशेकेदी का कार्यकाल

कबीला के इस नए मोर्चे का ऐलान ऐसे वक्त हुआ है जब कांगो का राजनीतिक माहौल अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है। कबीला के उत्तराधिकारी और मौजूदा राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिशेकेदी (63) का दूसरा और अंतिम पांच साल का कार्यकाल 2028 में समाप्त होने वाला है।

कांगो के संविधान के तहत कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है। इसके बावजूद, सत्ताधारी गठबंधन (presidential majority) पिछले कई महीनों से संविधान में संशोधन को लेकर जनमत तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

बेअसर रहे तमाम शांति समझौते

कांगो का पूर्वी इलाका पिछले 30 सालों से भीषण हिंसा का सामना कर रहा है। इस दौरान मध्यस्थता की कई कोशिशें जमीनी स्तर पर विफल रही हैं।

दिसंबर में वाशिंगटन की देखरेख में किंशासा (कांगो) और किगाली (रवांडा) के बीच हुए समझौते का कोई असर नहीं दिखा। वहीं, कतर की मध्यस्थता में जुलाई 2025 में किंशासा और M23 के बीच एक युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बनी थी, लेकिन मौजूदा हालात में उस सीजफायर का भी पालन नहीं किया जा रहा है।