हॉर्मुज में बढ़ता तनाव, 100 डॉलर पार तेल और खाड़ी देशों की ग्रोथ पर संकट

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का दबाव अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर साफ दिखने लगा है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रविवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कच्चे तेल के एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की पुष्टि की। इसके फौरन बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के चीफ अहमद वाहिदी ने विदेशी ताकतों को इस जलमार्ग से दूर रहने की खुली चेतावनी दी। युद्ध और व्यापारिक रुकावटों के कारण इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने साल 2026 के लिए मिडिल ईस्ट और मध्य एशिया की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान को घटाकर माइनस 0.3 प्रतिशत कर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट और ईरान की चेतावनी
समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम माने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। UKMTO के मुताबिक, जलमार्ग से बाहर निकल रहे एक क्रूड ऑयल टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया।
IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कड़ा संदेश दिया। वाहिदी ने लिखा कि किसी भी बाहरी ताकत को हॉर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में हस्तक्षेप करने, धौंस जमाने या सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश नेविगेशन की सुरक्षा के नाम पर इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी को सही ठहरा रहे हैं। तेहरान लगातार इस विदेशी मौजूदगी का विरोध कर रहा है।
युद्ध की आर्थिक कीमत: IMF ने घटाया ग्रोथ का अनुमान
हॉर्मुज में जारी गतिरोध का सीधा असर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। IMF की लेटेस्ट ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में मिडिल ईस्ट और मध्य एशिया की अर्थव्यवस्था में 0.3 प्रतिशत की गिरावट (Contraction) दर्ज की जाएगी।
छह महीने पहले IMF ने इस क्षेत्र में 1.9 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान जताया था। संस्था ने बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने या वहां व्यवधान होने के कारण यह अनुमान घटाया गया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में भी 2026 के दौरान 3.3 प्रतिशत के संकुचन (Contraction) का अनुमान है।
RAF फेयरफोर्ड साजिश पर ब्रिटेन और ईरान में ठनी
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) ने संसद में बयान दिया कि ब्रिटेन के मिलिट्री एयरबेस ‘RAF फेयरफोर्ड’ पर संदिग्ध साजिश के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ होना “लगभग तय” है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने ब्रिटेन से अपने दावों को साबित करने के लिए सबूत पेश करने की चुनौती दी है। तेहरान का आरोप है कि लंदन बिना सबूत के गंभीर आरोप लगा रहा है ताकि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों में अपनी संलिप्तता से ध्यान भटका सके।
रियाद एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला
सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ली है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल से सटीक निशाना लगाया है। दक्षिणी सऊदी अरब के खामिस मुशैत बेस पर भी ड्रोन से हमला करने का दावा किया गया।
सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख डॉ. सालेह बिन फौजान अल-फौजान ने नागरिकों और मक्का-मदीना जाने वाले जायरीनों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की।
यमन में सरकारी सेना ने हूतियों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने ‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान की जानकारी दी है। सैन्य प्रवक्ता कर्नल मजीद अल-नुजैली के मुताबिक, 1,879 ऑपरेशनों में 950 हूती लड़ाके मारे गए हैं और उनके 380 सैन्य वाहन नष्ट किए गए हैं।
ईरान के भीतर सुलगता बलूचिस्तान
ईरान क्षेत्रीय मोर्चों पर उलझा है और उसके भीतर भी अशांति का दौर जारी है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह (HRANA) की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च से अब तक दक्षिण-पूर्वी ईरान (विशेषकर सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत) में सुरक्षा बलों और सशस्त्र गुटों के बीच झड़पों में 94 लोगों की मौत हो चुकी है और 33 लोग घायल हुए हैं।

