रोज 800 रुपये कमाने वाला अमीरों में, विकसित देशों में गरीबों की कतार में!

6bbf7b02-2e1b-4689-a8db-9741218008b9
सैफी हुसैन
सैफी हुसैन

दुनिया भर में आय की असमानता (Income Inequality) को लेकर वर्ल्ड बैंक (World Bank) की एक नई रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ल्ड बैंक के ‘पॉवर्टी एंड इनइक्वलिटी प्लेटफॉर्म’ (Poverty and Inequality Platform) के आंकड़ों के मुताबिक, विकसित देशों के सबसे निचले तबके (सबसे गरीब 10 फीसदी) के लोगों की लाइफस्टाइल और इनकम, भारत के सबसे धनवान (टॉप 10 फीसदी) लोगों की तुलना में कहीं बेहतर है।

इस रिपोर्ट से साफ जाहिर होता है कि भारत में जो परिवार सबसे अमीर तबके में गिने जाते हैं, उनका रोजाना का औसत खर्च अमेरिका या कनाडा जैसे विकसित देशों के सबसे गरीब लोगों से भी कम है।

क्या कह रहे हैं वर्ल्ड बैंक के आंकड़े? (सबसे निचले 10% लोग)

विभिन्न देशों में सबसे गरीब और सबसे अमीर लोगों की रोजाना की इनकम में जमीन-आसमान का फर्क है। अगर दुनिया के सबसे गरीब 10 फीसदी लोगों के रोजाना खर्च की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • भारत: देश में निचले स्तर के 10 फीसदी लोगों का रोजाना का खर्च करीब 3 डॉलर (लगभग 250 रुपये) प्रति व्यक्ति है।

  • अमेरिका: विकसित देश अमेरिका में सबसे गरीब 10 फीसदी लोगों के खर्च का आंकड़ा 25 डॉलर (लगभग 2,100 रुपये) है।

  • कनाडा: यहां सबसे गरीब 10 फीसदी लोगों का रोजाना खर्च 31 डॉलर है।

  • जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया: इन दोनों देशों में यह आंकड़ा करीब 28 डॉलर है।

भारत के टॉप 10% अमीरों का हाल

अगर हम भारत के टॉप 10 फीसदी अमीरों के रोजाना खर्च की बात करें, तो यह महज 10 डॉलर (लगभग 840 रुपये) प्रति व्यक्ति से शुरू होता है। भारत के इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति हर महीने 80,000 रुपये कमाता है, तो वह देश के टॉप 10 फीसदी कमाने वालों की सूची में शामिल हो जाता है।

विकसित देशों के टॉप 10% अमीरों का खर्च: भारत की तुलना में, अमेरिका के टॉप 10 फीसदी अमीरों का रोजाना का खर्च 173 डॉलर है। वहीं, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में यह 129 डॉलर और जर्मनी में 128 डॉलर है।

आंकड़ों का निष्कर्ष: 10 डॉलर का गणित

इन आंकड़ों को देखने से साफ जाहिर होता है कि रोजाना 10 डॉलर खर्च का जो आंकड़ा भारत में किसी व्यक्ति को टॉप 10 फीसदी अमीरों की श्रेणी में खड़ा करता है, वही 10 डॉलर का आंकड़ा कनाडा, जापान और अमेरिका जैसे देशों में उस व्यक्ति को सबसे निचले 10 फीसदी गरीबों की कैटेगरी में ला देता है। यह रिपोर्ट न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर आय के अंतर और जीवन स्तर (Lifestyle) में मौजूद भारी असमानता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।