पोप लियो 14वें की फेफड़े की सर्जरी अगले कुछ दिनों में, रिकवरी में एक हफ्ता

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

दुनिया के 1.4 अरब कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप लियो 14वें (Pope Leo XIV) के फेफड़े की सर्जरी की जाएगी। रविवार को सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपने साप्ताहिक संबोधन के दौरान 71 वर्षीय पोप ने खुद यह स्वास्थ्य जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हालिया मेडिकल जांच में उनके फेफड़े में एक गांठ (nodule) मिली है, जिसे हटाने के लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है।

‘शुरुआती स्टेज में हुई गांठ की पहचान’

एंजेलस प्रार्थना के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पोप लियो ने कहा, “हाल ही में हुए मेडिकल चेकअप के दौरान मेरे फेफड़े में एक गांठ पाई गई है। यह बेहद शुरुआती स्टेज में पकड़ी गई है और एक ही जगह तक सीमित है।”

उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों का मानना है कि इस गांठ को जल्द से जल्द हटाना सही होगा, इसलिए उनकी सलाह मानते हुए यह ऑपरेशन आने वाले दिनों में किया जाएगा। पोप के बयान के तुरंत बाद वेटिकन प्रेस कार्यालय ने भी पुष्टि की कि ऑपरेशन के बाद उनके ठीक होने (रिकवरी) में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा।

इतिहास में अमेरिका से आने वाले पहले पोप

मूल रूप से अमेरिका के शिकागो में जन्मे पोप लियो 14वें का असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट है। 21 अप्रैल 2025 को 88 वर्ष की आयु में पूर्व पोप फ्रांसिस के निधन के बाद, 8 मई 2025 को उन्हें नया पोप चुना गया था। इसके साथ ही वे कैथोलिक चर्च के इतिहास में अमेरिका से आने वाले पहले पोप बन गए थे।

पूर्व पोप फ्रांसिस ने भी अपने स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण रोम के जेमेली (Gemelli) अस्पताल में कई हफ्ते बिताए थे। पारंपरिक रूप से बीमार पड़ने पर पोप का इलाज इसी अस्पताल में किया जाता है।

ट्रंप से टकराव और वैश्विक मुद्दों पर मुखरता

अपने पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस की तुलना में कम मुखर माने जाने वाले पोप लियो ने पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर वैश्विक संघर्षों तक कई गंभीर मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है।

फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध छेड़ने के बाद से पोप लियो इस संघर्ष के प्रमुख आलोचक बनकर उभरे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नष्ट करने की धमकी को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ करार दिया था और अमेरिकी नागरिकों से अपील की थी कि वे अपने सांसदों पर शांति स्थापित करने का दबाव बनाएं।

पोप की इस टिप्पणी पर राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ‘अपराध पर कमजोर और विदेश नीति के लिए भयानक’ बताया था। ट्रंप के इस बयान पर पलटवार करते हुए पोप लियो ने स्पष्ट किया था कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना उनका ‘नैतिक कर्तव्य’ है।