सोने का भंडार बढ़ाए या महंगे कर्ज से राहत दे? युगांडा पर IMF का जवाब

युगांडा इस वक्त अपनी अर्थव्यवस्था को एक नया आकार देने की तैयारी कर रहा है। देश तेल से होने वाली कमाई की उम्मीद कर रहा है, अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए सोना खरीद रहा है और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके साथ ही युगांडा उस ईस्ट अफ्रीकन प्रोजेक्ट से भी जुड़ा है, जिसका अंतिम लक्ष्य एक साझा क्षेत्रीय मुद्रा (Single Regional Currency) लागू करना है।
लेकिन इन बड़ी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के नीचे कुछ ऐसी बुनियादी कमजोरियां हैं, जिनका सामना युगांडा के आम नागरिक हर रोज कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के रेजिडेंट प्रतिनिधि सेबस्टियन वॉकर ने ‘द ऑब्जर्वर’ को दिए एक इंटरव्यू में इन विरोधाभासों, महंगे कर्ज, सोने की खरीद और बैंक ऑफ युगांडा (BOU) में IMF के दफ्तर को लेकर विस्तार से बात की है।
महंगे कर्ज का बोझ और सरकार की उधारी
युगांडा में केंद्रीय बैंक की ब्याज दर लगभग दो साल से 9.75 प्रतिशत पर बनी हुई है, लेकिन आम लोगों और कारोबारियों को कमर्शियल लोन अभी भी 19 से 25 प्रतिशत के भारी-भरकम ब्याज पर मिल रहा है। इस अंतर पर वॉकर ने कहा कि सरकार द्वारा भारी मात्रा में कर्ज लेने से प्राइवेट सेक्टर के लिए क्रेडिट (ऋण) कम हो रहा है। उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए राजकोषीय मजबूती (Fiscal Consolidation) की जरूरत पर जोर दिया।
उनके मुताबिक, कुछ ढांचागत समस्याएं भी कर्ज को महंगा बना रही हैं। इनमें कमजोर क्रेडिट इंफॉर्मेशन सिस्टम, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, विश्वसनीय वित्तीय स्टेटमेंट्स का अभाव और गिरवी रखने के लिए संपत्तियों (Collateral) की कमी शामिल है। इन वजहों से बैंकों का क्रेडिट रिस्क और ऑपरेटिंग खर्च बढ़ जाता है।
सोने की खरीद पर IMF की चेतावनी
बैंक ऑफ युगांडा ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर सोना खरीदने का तीन साल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस कदम से जुड़े जोखिमों पर IMF प्रतिनिधि ने साफ किया कि सोने की कीमत में अस्थिरता, तरलता की कमी, स्टोरेज सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग (Anti-Money Laundering) जैसी गंभीर चिंताएं मौजूद हैं।
वॉकर ने कहा कि इन जोखिमों को कम करने के लिए मजबूत सेफगार्ड्स (सुरक्षा उपायों) और एक आंतरिक नियंत्रण ढांचे की जरूरत है। उन्होंने पारदर्शी प्राइसिंग फ्रेमवर्क की भी वकालत की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि IMF ने विदेशी मुद्रा की खरीदारी जारी रखने को कहा है, लेकिन सोने से कमाई करने के लिए ‘गोल्ड स्वैप’ या ‘गोल्ड लीजिंग’ जैसी कोई विशेष रणनीति नहीं सुझाई है।
तेल की कमाई और बैंक की स्वतंत्रता
युगांडा जल्द ही पेट्रोलियम से होने वाली कमाई हासिल करने जा रहा है। वर्तमान में बैंक ऑफ युगांडा ही ‘पेट्रोलियम रेवेन्यू इन्वेस्टमेंट फंड’ का प्रबंधन करता है। इस पर वॉकर ने कहा कि बैंक ऑफ युगांडा की स्वतंत्रता बनाए रखने और तेल राजस्व के सही प्रबंधन के लिए मजबूत फ्रेमवर्क का होना बेहद जरूरी है।
IMF ने सिफारिश की है कि सरकार को मौद्रिक वित्तपोषण (Monetary Financing) को सीमित करना चाहिए। साथ ही तेल की कमाई की निकासी के लिए पारदर्शी नियम और गवर्नेंस की व्यवस्था की जानी चाहिए।
ईस्ट अफ्रीकन करेंसी और क्रिप्टो पर रुख
2031 तक ‘ईस्ट अफ्रीकन सिंगल करेंसी’ लागू करने के लक्ष्य पर वॉकर ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से ईस्ट अफ्रीकन कम्युनिटी (EAC) के भागीदार देशों और क्षेत्रीय संस्थानों पर निर्भर करता है। IMF का फोकस केवल इस बात पर है कि महंगाई, राजकोषीय घाटे, सार्वजनिक कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे पैमानों पर सदस्य देश मजबूत हों।
क्रिप्टोकरेंसी को टैक्स सिस्टम में लाने के सवाल पर वॉकर ने बताया कि IMF ने घरेलू राजस्व जुटाने के लिए युगांडा को तकनीकी सहायता दी है। क्रिप्टो के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनका विश्लेषण यह बताता है कि यह देशों के लिए टैक्स पॉलिसी और प्रशासन से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकता है।
बैंक ऑफ युगांडा के अंदर IMF के दफ्तर पर सफाई
बैंक ऑफ युगांडा के अंदर ही IMF का दफ्तर होने पर कई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। आलोचकों का मानना है कि इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और IMF एक ऋणदाता होने के साथ-साथ सलाहकार की दोहरी भूमिका निभा रहा है।
इन चिंताओं को सिरे से खारिज करते हुए वॉकर ने कहा कि कई देशों में IMF के दफ्तर केंद्रीय बैंक या वित्त मंत्रालय के अंदर होस्ट किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि IMF की भूमिका केवल विश्लेषण, नीतिगत सलाह, तकनीकी सहायता और मांगी गई वित्तीय मदद देने तक सीमित है। वॉकर ने जोर देकर कहा कि IMF नीतियां तय नहीं करता, राष्ट्रीय एजेंसियां अपने आर्थिक फैसलों और स्वायत्तता के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।

