ज्ञानेश कुमार का सफर: रक्षा मंत्रालय से Article 370 तक कहानी क्या है?

gyanesh kumar
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मौजूदा संवैधानिक भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चाओं के साथ ही उनके करीब तीन दशक लंबे प्रशासनिक करियर का रिकॉर्ड भी सामने आया है। 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रोफाइल और सेवा रिकॉर्ड के मुताबिक, वह केवल मौजूदा केंद्र सरकार के दौर में ही नहीं, बल्कि इससे पहले केंद्र की कांग्रेस-नीत यूपीए (UPA) सरकार के कार्यकाल में भी अहम मंत्रालयों में प्रमुख जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

UPA सरकार में संभाला रक्षा उत्पादन का जिम्मा

ज्ञानेश कुमार की केंद्र सरकार में प्रमुख प्रतिनियुक्ति 2007 से 2012 के बीच दर्ज है। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान वह रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिफेंस प्रोडक्शन) के पद पर तैनात थे। इस पांच साल के कार्यकाल के दौरान रक्षा साजो-सामान के उत्पादन और उससे जुड़े नीतिगत मामलों में मंत्रालय स्तर पर उनकी सीधी प्रशासनिक भागीदारी रही थी।

केरल में कई विभाग और दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर

ज्ञानेश कुमार का प्रशासनिक अनुभव केवल केंद्र तक सीमित नहीं रहा। अपने मूल कैडर राज्य केरल में उन्होंने वित्त संसाधन (Finance Resources), लोक निर्माण विभाग (PWD) और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले जैसे विभागों में सेवाएं दीं।

वर्ष 2012 से 2016 तक वह नई दिल्ली स्थित केरल भवन में रेजिडेंट कमिश्नर के पद पर रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में राज्य सरकार के मुख्य प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में काम किया। उस समय केरल में ओमन चांडी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-नीत यूडीएफ (UDF) सरकार सत्ता में थी।

सिविल सेवा नियमावली के तहत आईएएस अधिकारी अपने सेवाकाल में अलग-अलग राजनीतिक दलों की निर्वाचित सरकारों के अधीन रहकर प्रशासनिक व संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

मोदी सरकार में गृह मंत्रालय और अनुच्छेद 370

ज्ञानेश कुमार के करियर का अगला चरण 2016 के बाद शुरू हुआ, जब वह दोबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आए। केंद्रीय गृह मंत्रालय में उन्होंने पहले संयुक्त सचिव और बाद में अतिरिक्त सचिव के रूप में काम किया।

वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने और ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’ के प्रशासनिक क्रियान्वयन में उनकी सीधी भूमिका रही। गृह मंत्रालय के बाद उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव और बाद में नवगठित सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) के सचिव पद का दायित्व संभाला।

संवैधानिक पद और प्रशासनिक पृष्ठभूमि

निर्वाचन आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था के शीर्ष पद पर नियुक्ति के बाद अधिकारियों के पुराने सेवा रिकॉर्ड, नीतिगत फैसलों और विभिन्न सरकारों के साथ काम करने के तजुर्बे की समीक्षा अक्सर राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों द्वारा की जाती रही है। चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार का सिविल सेवा करियर केंद्र और राज्य स्तर पर कई अलग-अलग सियासी गठबंधनों के शासनकाल में फैला रहा है।