Khamenei: ईरान दुनिया की सबसे बड़ी ताकत, विदेशी दबदबे के दिन खत्म

Mojataba Khamenei
सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि विदेशी प्रभुत्व के वो दिन अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, जिन्हें ईरान के दुश्मन वापस लाना चाहते हैं। ‘पवित्र रक्षा सप्ताह’ (Sacred Defense Week) और हिजबुल्लाह के दिवंगत नेता सैयद हसन नसरल्लाह की हत्या की दूसरी बरसी के मौके पर सोमवार को उन्होंने यह संदेश जारी किया।

पवित्र रक्षा सप्ताह 1980 से 1988 तक पूर्व इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध की शुरुआत की याद में मनाया जाता है। अपने संदेश में मोजतबा खामेनेई ने ईरान की सैन्य ताकत, ऐतिहासिक संघर्ष और हिजबुल्लाह के भविष्य को लेकर कई बड़े दावे किए।

‘दुनिया की चौथी, लेकिन ईश्वरीय गणना में पहली ताकत’

ईरान की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए खामेनेई ने कहा कि आज कुछ लोग सांसारिक गणनाओं के आधार पर ईरान को दुनिया की चौथी महाशक्ति मानते हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन ईश्वरीय गणनाओं के आधार पर, जो देश खुद को पैगंबर मुहम्मद के पवित्र घराने से जुड़ा मानता है और जिसके लोग सच्चाई को बनाए रखने में कोई डर नहीं रखते, वह दुनिया की पहली ताकत है।”

1953 के ब्रिटिश और अमेरिकी समर्थन वाले तख्तापलट का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह युग बहुत पहले बीत चुका है जब औपनिवेशिक ताकतें मनोवैज्ञानिक अभियान चलाकर खौफ का माहौल बना सकती थीं और देश की संपत्ति लूट सकती थीं।

सद्दाम हुसैन का मुगालता और ‘फीनिक्स’ की तरह उठा ईरान

1980 के दशक के युद्ध का जिक्र करते हुए अयातुल्ला खामेनेई ने कहा कि बाथ शासन (सद्दाम हुसैन) को यह मुगालता था कि यह युद्ध सिर्फ कुछ दिनों का होगा और उसे आसानी से जीत मिल जाएगी। इसके विपरीत, ईरान राख से उठने वाले ‘फीनिक्स’ पक्षी की तरह पहले से कहीं अधिक परिपक्व और मजबूत होकर उभरा।

उन्होंने बताया कि युद्ध की शुरुआत में पश्चिम समर्थित राजशाही ने देश को खाली हाथ छोड़ दिया था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। उनके मुताबिक, “अब हम उस दौर में पहुंच गए हैं जहां हमलावर अपने प्रॉक्सी के बजाय खुद इस्लामिक सैन्य बलों के हमलों से बचने के लिए पनाह मांग रहे हैं और युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रहे हैं।”

अरब सागर से भी साफ होगा दुश्मनों का नामोनिशान

समुद्री सुरक्षा पर खामेनेई ने कहा कि एक समय था जब दक्षिणी ईरान के दो समुद्र दुश्मन ताकतों के लिए “खेल के मैदान” की तरह थे। ईरानी लड़ाकों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रक्षकों की वजह से अब वे अरब सागर से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करते। उन्होंने चेतावनी दी कि जब भी उन्होंने ऐसा जोखिम उठाया, उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है और जल्द ही अरब सागर को भी उनकी मौजूदगी से मुक्त कर दिया जाएगा।

देश की रक्षा में महिलाओं की भूमिका को सराहते हुए उन्होंने कहा कि ईरानी महिलाएं बहादुरी के मामले में कई क्षेत्रों में पुरुषों से आगे निकल रही हैं।

नसरल्लाह को श्रद्धांजलि और हिजबुल्लाह का नया नेतृत्व

हिजबुल्लाह चीफ की दूसरी बरसी पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए खामेनेई ने हसन नसरल्लाह को एक वीर अरब नेता और प्रतिरोध (Resistance) मोर्चे का महान प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नसरल्लाह ने लेबनान के नाम और रुतबे को उस स्तर तक उठाया, जिसे वर्षों तक कुछ ताकतों ने अपना “पिछवाड़ा” (backyard) समझ रखा था।

खामेनेई ने कहा कि नसरल्लाह का झंडा अब हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम के हाथों में है, जो साहस के साथ उनके रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने इस्लामिक क्रांति के संस्थापक अयातुल्ला खुमैनी और शहीद अयातुल्ला खामेनेई को भी याद किया और कहा कि देश का मौजूदा सम्मान उनके नेतृत्व का ही कर्ज है।