हिजबुल्लाह के पूर्व चीफ नसरल्लाह को लेकर Islamic Jihad ने क्या कहा?

हिजबुल्लाह के पूर्व प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह की मौत के दो साल पूरे होने पर फिलिस्तीनी ‘इस्लामिक जिहाद’ मूवमेंट ने उनकी विरासत और काम की तारीफ की है। ईरान में इस्लामिक जिहाद के प्रतिनिधि नासिर अबू शरीफ ने कहा कि नसरल्लाह ने इजरायल और उसके सहयोगियों के खिलाफ मुस्लिम देशों के बीच एक एकजुट मोर्चा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
नसरल्लाह की दूसरी बरसी के मौके पर प्रेस टीवी (Press TV) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अबू शरीफ ने उन्हें प्रतिरोध (Resistance) के इतिहास के सबसे अहम चेहरों में से एक बताया।
‘प्रतिरोध के लिए जीत के निर्माता’
अबू शरीफ ने कहा कि नसरल्लाह का प्रभाव केवल लेबनान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरे मध्य पूर्व में काम कर रहे गुटों की दिशा तय की। उन्होंने कहा, “सैयद हसन नसरल्लाह कोई आम इंसान या सामान्य लड़ाके नहीं थे। वह एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक शख्सियत थे, जो प्रतिरोध के लिए जीत के निर्माता थे।”
अबू शरीफ के मुताबिक, लेबनान के जटिल राजनीतिक और सामाजिक माहौल के बावजूद हिजबुल्लाह को मजबूत करने का श्रेय नसरल्लाह को जाता है। उन्होंने दावा किया कि तमाम झटकों के बावजूद नसरल्लाह ने पूरे क्षेत्र के अलग-अलग गुटों को एक साझा संघर्ष के विचार के तहत एकजुट किया।
‘मनोवैज्ञानिक युद्ध और मीडिया के मास्टर’
इजरायल के खिलाफ नसरल्लाह की रणनीति का जिक्र करते हुए इस्लामिक जिहाद के प्रतिनिधि ने उनके मीडिया प्रबंधन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “वह मनोवैज्ञानिक युद्ध के मास्टर थे। वह अपने शब्दों से इजरायलियों का सामना करने में माहिर थे।” अबू शरीफ ने दावा किया कि नसरल्लाह के भाषणों ने लेबनान और फिलिस्तीन को लेकर फैलाई जाने वाली इजरायली सूचनाओं की काट की।
अबू शरीफ ने बताया कि नसरल्लाह के सार्वजनिक भाषण उनके समर्थकों को भारी संघर्ष के दौरान भी प्रेरणा और आत्मविश्वास देते थे।
अमेरिका के ‘न्यू मिडिल ईस्ट’ प्रोजेक्ट का विरोध
अबू शरीफ ने नसरल्लाह और ईरान के संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नसरल्लाह ईरान की इस्लामिक क्रांति को क्षेत्रीय संघर्ष का एक प्रमुख हिस्सा मानते थे और दोनों के बीच आपसी सम्मान पर आधारित सहयोग था। अबू शरीफ ने यह भी कहा कि नसरल्लाह ने अमेरिका के ‘न्यू मिडिल ईस्ट’ (New Middle East) प्रोजेक्ट का हमेशा विरोध किया, क्योंकि उनका मानना था कि यह रणनीति मध्य पूर्व के देशों को कमजोर करने और बांटने के लिए बनाई गई है।
गाजा युद्ध में लेबनान का समर्थन
फिलिस्तीनी गुटों और हिजबुल्लाह के बीच समन्वय पर बोलते हुए अबू शरीफ ने गाजा युद्ध के दौरान लेबनान के समर्थन को फिलिस्तीन के साथ ‘व्यावहारिक एकजुटता’ का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि लेबनान ने फिलिस्तीन का साथ दिया और इस कारण उसे भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है।
सैयद हसन नसरल्लाह की मौत 27 सितंबर 2024 को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिया (Dahiyeh) में एक बड़े इजरायली हवाई हमले में हुई थी। इजरायल ने हिजबुल्लाह की मजबूत पकड़ वाले हरेट ह्रीक (Haret Hreik) इलाके में रिहायशी इमारतों को निशाना बनाने के लिए बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया था। हमले के अगले दिन हिजबुल्लाह ने आधिकारिक तौर पर नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की थी।

