‘अब अमेरिका पर भरोसा नहीं’… पेजेशकियन ने US-इजरायल पर बोला हमला

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने अमेरिका के साथ बातचीत की संभावनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत पर तेहरान का भरोसा उठ गया है। पेजेशकियन ने इसके पीछे की वजह अमेरिकी सैन्य हमलों और इस्लामिक गणराज्य (ईरान) पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को बताया है, जिसके कारण पूर्व की सभी वार्ताओं में बाधा पहुंची है।

शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, “हमें अमेरिकी पक्ष पर कोई भरोसा नहीं है और हम नहीं जानते कि किस आधार पर उनके साथ किसी तरह की सहमति बन सकती है।”

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पेजेशकियन और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लिया था।

कतर और पाकिस्तान निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका

इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान ने 7 दिनों के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पेश किया था।

इंटरव्यू के दौरान पेजेशकियन ने बताया कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और ईरान के संदेशों को वाशिंगटन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा बातचीत उसी समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित है, जो जून में दोनों पक्षों के बीच हुआ था। हालांकि, यह समझौता पिछले महीने समाप्त हो गया है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन को उस समझौते पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना ‘स्वाभाविक प्रतिक्रिया’

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को बाधित करने के आरोपों पर जवाब देते हुए, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने ईरान की जिम्मेदारी से इनकार किया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के बंद होने को ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाइयों का सीधा परिणाम बताया।

पेजेशकियन ने कहा, “अमेरिका ने हमारे लिए रास्ते बंद कर दिए। यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, जब ईरान के लिए रास्ते काट दिए जाते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस संकट का समाधान कूटनीति से किया जा सकता है, न कि बल प्रयोग से। उन्होंने दोहराया कि अगर बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त होता है, तो कमर्शियल शिपिंग दोबारा शुरू हो सकती है।

“ईरान ने 200 साल में किसी देश पर हमला नहीं किया”

अमेरिका को मौजूदा युद्ध में ‘हमलावर’ करार देते हुए पेजेशकियन ने कहा कि ईरान ने पिछले 200 वर्षों में किसी भी देश पर हमला नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने क्षेत्रीय देशों को यह सोचकर युद्ध में खींचा कि ईरानी व्यवस्था “कुछ ही दिनों में ढह जाएगी।”

ईरानी राष्ट्रपति ने दृढ़ता दिखाते हुए कहा, “हमने अमेरिकी और इजरायली हमलों का डटकर सामना किया और हम मजबूती से खड़े रहेंगे।” उन्होंने साफ किया कि न तो ईरानी कमांडरों की हत्या और न ही आर्थिक दबावों ने देशवासियों को पीछे हटने पर मजबूर किया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका ने मुस्लिम देशों के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर ईरान पर हमले किए हैं। पेजेशकियन के मुताबिक, ईरान उन ठिकानों को इसलिए निशाना बनाता है, क्योंकि वहां से उसके खिलाफ अमेरिकी सेना के हमले लॉन्च किए जाते हैं।

प्रतिबंधों की तुलना गाजा के हालातों से की

पेजेशकियन ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को इजरायल द्वारा गाजा में अपनाई जा रही रणनीति के समान बताया। उन्होंने कहा, “जो लोग ईरानियों को दवाइयां और कच्चा माल देने से रोक रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्होंने गाजा का पानी और खाना बंद कर दिया है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग यह मानते हैं कि ईरान को प्रतिबंधों के जरिए कमजोर किया जा सकता है, उनकी गणना “गलत” है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन के मुद्दे पर क्या कहा? ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा मध्य पूर्व के देशों के आपसी सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा, “हमें किसी क्षेत्रीय पुलिसकर्मी (Regional Policeman) की जरूरत नहीं है।” उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर मुस्लिम देशों को बांटकर क्षेत्र के संसाधनों पर कब्जा करने का आरोप लगाया और कहा कि सऊदी अरब मुस्लिम जगत में एकता को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

यमन के मामले पर हूतियों (Houthis) से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए पेजेशकियन ने ईरान की संलिप्तता से इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि तेहरान उन सभी के साथ खड़ा है जिनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने हूतियों और सऊदी अरब से बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाने की अपील की।

घरेलू मोर्चे पर बात करते हुए पेजेशकियन ने कहा कि देश के “दुश्मन” ईरानी अधिकारियों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हकीकत में देश अभूतपूर्व एकता और एकजुटता का अनुभव कर रहा है।