Waiting Hai : दिव्येंदु-भुवन की टिकट स्कैम वाली सीरीज में कितना दम?

भारतीय रेलवे इस देश की लाइफलाइन है, जहां हर दिन औसतन 2.4 करोड़ लोग सफर करते हैं। रेलवे में कंफर्म टिकट के लिए मारी-मार और खासकर तत्काल टिकट (Tatkal Ticket) हासिल करने के लिए आम यात्रियों की जद्दोजहद किसी से छिपी नहीं है। इसी जानी-पहचानी झुंझलाहट और एक बड़े घोटाले को केंद्र में रखकर Amazon MX Player पर नई वेब सीरीज ‘वेटिंग है’ (Waiting Hai) रिलीज हुई है।
पटना की पृष्ठभूमि पर बनी 7 एपिसोड की यह सीरीज पुलिस इन्वेस्टिगेशन, फैमिली ड्रामा, ह्यूमर और टेक्नोलॉजी का एक दिलचस्प मेल पेश करती है।
‘वेटिंग है’ वेब सीरीज की कहानी
कहानी के केंद्र में सुगम मिश्रा (दिव्येंदु शर्मा) हैं, जो रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) में नए भर्ती हुए कॉन्स्टेबल हैं। वह अपनी नई ड्यूटी और शादीशुदा जिंदगी के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। ड्यूटी ज्वाइन करने के कुछ ही समय बाद सुगम को एक अजीब पैटर्न नजर आता है—आम यात्रियों को जहां कंफर्म तत्काल टिकट के लिए घंटों पसीना बहाना पड़ता है, वहीं कुछ एजेंट बेहद आसानी से और संदिग्ध तरीकों से टिकट हासिल कर लेते हैं। अपने गुजर चुके सुसज्जित पिता की यादों का मान रखने और खुद को साबित करने की चाह में सुगम इस गड़बड़ी की तह तक जाने का फैसला करते हैं।
सुगम की यह जांच उसे अफरोज हम्सा (भुवन अरोड़ा) तक ले जाती है, जो कंप्यूटर का एक होनहार स्टूडेंट है और रेलवे बुकिंग सिस्टम में सेंध लगाने के तरीके ढूंढ निकालता है। एक लड़की को इंप्रेस करने की मासूम कोशिश के तौर पर शुरू हुआ यह खेल धीरे-धीरे एक बहुत बड़े और मुनाफे वाले अवैध रैकेट में बदल जाता है। अफरोज अपने चालाक मामा (विजय मौर्या) की मदद से इस दलदल में और धंसता चला जाता है। इसके बाद शुरू होता है गैर-कानूनी तत्काल एजेंटों के नेटवर्क और पुलिस के बीच चूहे-बिल्ली का रोमांचक खेल।
मूवी रिव्यू: सीरीज की खूबियां और कमियां
‘वेटिंग है’ की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह तत्काल टिकट के घोटाले को सिर्फ पुलिस बनाम क्रिमिनल की घिसी-पिटी कहानी की तरह नहीं दिखाती।
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मजबूत इमोशनल आधार: सुगम और अफरोज कई मायनों में एक-दूसरे के समानांतर किरदार हैं। सुगम सिस्टम में ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पता चलता है कि महकमे के भीतर यह कितना मुश्किल है। वहीं, अफरोज एक अनुभवहीन युवा से एक कॉन्फिडेंट ऑपरेटर बनता है। इन दोनों की यात्राएं शो को एक मजबूत भावनात्मक आधार देती हैं।
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कमजोरियां और उतार-चढ़ाव: अफसोस की बात है कि कहानी हर जगह एक जैसी मजबूत नहीं है। कई बार मुख्य प्लॉट से हटकर दिखाए गए सीन जांच से अलग-थलग और सोशल मीडिया स्केच जैसे लगते हैं। इसके अलावा, एक गंभीर या इमोशनल सीन के तुरंत बाद अचानक बचकानी कॉमेडी आ जाने से कहानी का टोन और रफ्तार टूट जाती है।
कलाकारों की एक्टिंग
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भुवन अरोड़ा: अफरोज के किरदार में भुवन ने शानदार गहराई दिखाई है। एक भोले-भाले छात्र से लेकर कॉन्फिडेंट स्कैमर बनने तक का उनका सफर बेहद स्वाभाविक और भरोसेमंद लगता है।
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दिव्येंदु शर्मा: सुगम के रूप में दिव्येंदु उतने ही असरदार हैं। उन्होंने एक ऐसे पुलिसवाले का किरदार निभाया है जिसके पास हर सवाल का जवाब नहीं है। अपनी कमजोरियों और पारिवारिक उलझनों के साथ वह बहुत रियल लगते हैं।
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सपोर्टिंग कास्ट: हर्षिता गौर (प्रिंसी) और कुमुद मिश्रा ने अपने किरदारों को पूरी मजबूती दी है। घर-परिवार के सीन इन्वेस्टिगेशन के बीच जरूरी गर्माहट और हल्के-फुल्के पल लाते हैं।
रेटिंग: 3/5 (तीन स्टार)

