Shaque Trust No One: रहस्य, शक और इमोशन, कैसी है Netflix की सीरीज?

Shaque Trust No One
राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

एक मां के लिए इससे बड़ा सदमा क्या हो सकता है कि उसकी नवजात बच्ची उससे हमेशा के लिए दूर हो जाए? वह मां ना अपनी पहली संतान को भूल सकती है, ना ही उसे वापस पाने की उम्मीद उसे चैन से जीने देती है। एक मां की इसी भावुक और दर्द भरी कहानी के साथ परिणीति चोपड़ा ने वेब सीरीज की दुनिया में अपनी पारी शुरू की है। हालांकि, मेकर्स ने मां-बेटी की इस भावनात्मक कहानी के इर्द-गिर्द शक और साजिशों के ढेर सारे जाल बुनकर इसका रोमांच थोड़ा फीका कर दिया है। आइए जानते हैं कैसी है यह सीरीज।

‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की कहानी

कहानी शिमला की रहने वाली अन्विता (परिणीति चोपड़ा) की है, जिसकी नवजात बच्ची अपेक्षा अस्पताल से रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाती है। अन्विता को पूरा यकीन है कि उसकी बेटी जिंदा है और एक दिन उसे वापस जरूर मिलेगी। उसका यह विश्वास तब और पुख्ता हो जाता है, जब किडनैपर उसकी गुमशुदा बेटी के जन्मदिन पर उसकी तस्वीर भेजता है। यह सिलसिला पूरे नौ साल तक चलता है।

अन्विता को अपेक्षा की तलाश के अलावा कुछ और सूझता ही नहीं है। हालत यह हो जाती है कि पुलिस इंस्पेक्टर खुराना (अनूप सोनी) को छोड़कर, अन्विता का पति आलोक (ताहिर राज भसीन), उसकी दोस्त श्रेया (हरलीन सेठी) और सास (सोनी राजदान) समेत हर कोई उसे मानसिक रूप से बीमार समझने लगता है।

इसी बीच, अन्विता के पड़ोस में साक्षी माथुर (जेनिफर विंगेट) अपने पति (ध्रुव चौधरी) और बेटी रिया के साथ रहने आती है। अन्विता को लगता है कि रिया कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी खोई हुई बेटी अपेक्षा है। अब उसका यह शक सच है या सिर्फ उसका वहम, यही इस सीरीज की मुख्य कहानी है।

वेब सीरीज रिव्यू: कहां चूके मेकर्स?

डायरेक्टर रेंजिल डिसिल्वा और सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा द्वारा क्रिएट की गई यह सीरीज बचपन में परिवार से जुदा होने के बाद कई साल बाद दोबारा मिली बच्ची डेलिमार वेरा के चर्चित मामले से प्रेरित है। मूल आइडिया अपने आप में बेहद प्रभावशाली है।

  • मजबूत शुरुआत और बिखराव: सीरीज की शुरुआत काफी अच्छी और ग्रिपिंग है। लेकिन इसके बाद मेकर्स ने इसमें धोखेबाजी, तंत्र-मंत्र, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, हैलुसिनेशन और सरोगेसी जैसे तमाम मसाले इस तरह ठूंस दिए हैं कि पूरी कहानी एक खिचड़ी बनकर रह जाती है।

  • इमोशन की कमी: ढेर सारे ट्विस्ट और टर्न्स लाने की कोशिश में मुख्य प्लॉट कमजोर पड़ जाता है, जिससे अन्विता का असली दर्द उस गहराई से दर्शकों तक नहीं पहुंच पाता जैसी उम्मीद थी। इसके अलावा, मुख्य कलाकारों को छोड़कर बाकी किरदारों को ठीक से तराशा नहीं गया है।

कलाकारों की एक्टिंग

  • परिणीति चोपड़ा: बच्ची को खोने वाली एक मां की बेचैनी, छटपटाहट और भावनात्मक टूटन को परिणीति ने बहुत अच्छे से पर्दे पर उतारा है। हालांकि, एक सीमा के बाद उनके हाव-भाव थोड़े एक जैसे लगने लगते हैं।

  • जेनिफर विंगेट: ‘बेहद’ फेम जेनिफर विंगेट एक बार फिर अपने अभिनय से चौंकाती हैं। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी हर बार ध्यान खींचती है।

  • अनूप सोनी: एक संवेदनशील और सुलझे हुए पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में अनूप सोनी सबसे ज्यादा असरदार साबित होते हैं।

दूसरी ओर, ताहिर राज भसीन, हरलीन सेठी, सोनी राजदान, सुमित व्यास और ध्रुव चौधरी जैसे मंझे हुए कलाकारों को स्क्रिप्ट में पर्याप्त लेयर्स न मिलने के कारण वे उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते, जितने वे सक्षम हैं। शिमला की सर्द वादियां और बैकग्राउंड स्कोर सीरीज के रहस्य और तनाव को बढ़ाने का काम जरूर करते हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह सीरीज उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।

रेटिंग: 2.5/5 (ढाई स्टार)