2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’, 15 से लागू होगा ₹2,000 से ऊपर UPI MDR

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले नए शुल्क के खिलाफ देश भर के व्यापारी लामबंद हो गए हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) जैसे प्रमुख कारोबारी संगठनों ने गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) मनाने का ऐलान किया है। इस फैसले के तहत, 2 अक्टूबर को व्यापारी अपनी दुकानों पर UPI से पेमेंट नहीं लेंगे। आम जनता को खरीदारी के लिए कैश या डेबिट/क्रेडिट कार्ड का ही इस्तेमाल करना होगा।

क्या है कारोबारियों की नाराजगी की वजह?

व्यापारी मुख्य रूप से UPI ट्रांजैक्शन पर लगाए जा रहे 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क का विरोध कर रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज जैसे व्यापार में प्रॉफिट मार्जिन पहले ही बहुत कम होता है। इस पर अतिरिक्त टैक्स लगाए जाने से उन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

विरोध का स्तर इस कदर है कि इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 15 अक्टूबर से पहले यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे अपनी दुकानों की UPI QR कोड मशीनों को पानी में बहा देंगे।

मध्य प्रदेश में दिखा ‘नो यूपीआई डे’ का असर

इस बड़े आंदोलन से पहले ही 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में ‘नो UPI डे’ मनाया गया। इसमें करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस एक दिन के विरोध प्रदर्शन से ही राज्य भर में लगभग 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ।

कई राष्ट्रीय संगठनों ने दिया समर्थन

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स (MACCIA) और पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन भी इस आंदोलन के पुरजोर समर्थन में उतर आए हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, MACCIA के प्रेसिडेंट रवींद्र मंगवे ने कहा, “हमने देश भर में सभी व्यापारी संगठनों से बात की है और न सिर्फ महाराष्ट्र में, बल्कि दूसरे राज्यों ने भी 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का फैसला किया है।”

उन्होंने बताया कि MACCIA और उससे जुड़े 500 संगठन मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगें रखने की योजना बना रहे हैं। 2 अक्टूबर के इस बंद को फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ (AIEOTF) का भी समर्थन प्राप्त है।

नया नियम और MDR पर बवाल क्यों?

MDR एक प्रकार की प्रोसेसिंग फीस है, जो डिजिटल पेमेंट लेने के बदले मर्चेंट (व्यापारी) से वसूली जाती है। जब ग्राहक QR कोड स्कैन कर या कार्ड स्वाइप कर पेमेंट करता है, तो इस पैसे को सुरक्षित रूप से ट्रांसफर करने के लिए एक पूरा डिजिटल नेटवर्क (बैंक, पेमेंट गेटवे, NPCI) काम करता है। इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने और सुरक्षित रखने के खर्च को MDR कहा जाता है।

सरकार के नए फैसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% की फीस लगेगी। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। इसका अर्थ यह है कि ट्रांजैक्शन चाहे 1 लाख का हो या 10 लाख का, व्यापारी से किसी भी हाल में 300 रुपये से अधिक की फीस नहीं वसूली जाएगी।