₹18 हजार से ₹72 हजार होगी बेसिक? 4.0 फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित

indian rupee
अमित तिवारी
अमित तिवारी

आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच सबसे ज्यादा चर्चा ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठन लगातार सरकार से न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। अगर सरकार कर्मचारी संगठनों की मांग मानते हुए फिटमेंट फैक्टर 4.0 तय करती है, तो वर्तमान में 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 72,000 रुपये हो सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सरकार या 8वें वेतन आयोग की तरफ से अभी तक फिटमेंट फैक्टर का कोई आधिकारिक आंकड़ा तय नहीं किया गया है। यह सिर्फ संभावित आंकड़ों पर आधारित एक गणना है।

फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?

फिटमेंट फैक्टर एक ‘मल्टीप्लायर’ या वह संख्या है, जिसका इस्तेमाल पुरानी बेसिक सैलरी को नए वेतन ढांचे (Revised Basic Pay) में बदलने के लिए किया जाता है। यानी, संशोधित बेसिक पे = (मौजूदा बेसिक सैलरी) x (फिटमेंट फैक्टर)

  • उदाहरण: यदि किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और नया फिटमेंट फैक्टर 4.0 लागू होता है, तो: 18,000 x 4.0 = 72,000 रुपये (नई बेसिक सैलरी)।

3.83 और 4.0 फिटमेंट फैक्टर में कितना होगा अंतर?

कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को लेकर अलग-अलग मांगें आ रही हैं। कुछ ने 4.0 की मांग की है, तो कुछ ने 3.83 का प्रस्ताव रखा है। आइए समझते हैं दोनों में कितना अंतर होगा:

  • अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 हुआ: 18,000 x 3.83 = 68,940 रुपये (नई बेसिक पे)

  • अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 हुआ: 18,000 x 4.0 = 72,000 रुपये (नई बेसिक पे)

पिछले वेतन आयोगों में क्या था फिटमेंट फैक्टर?

वेतन निर्धारण में फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल नया नहीं है:

  • 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था।

  • 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था, जिससे न्यूनतम सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी।

क्या इन-हैंड सैलरी 72,000 रुपये हो जाएगी?

यह एक बड़ा सवाल है। अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 लागू होता है, तो 72,000 रुपये सिर्फ ‘रिवाइज्ड बेसिक पे’ होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी पूरी इन-हैंड सैलरी यही होगी। नए वेतन ढांचे के लागू होने के बाद, सरकार मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को रीसेट (शून्य) कर सकती है। इसके बाद, नई बेसिक सैलरी (72,000 रुपये) के आधार पर नए सिरे से HRA (मकान किराया भत्ता) और अन्य भत्ते तय किए जाएंगे, जिन्हें जोड़कर कर्मचारी की कुल ‘इन-हैंड सैलरी’ बनेगी।