‘किलिम’ बुनाई के लिए यूनेस्को (UNESCO) से वैश्विक मान्यता की तैयारी

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अजमल शाह
अजमल शाह

ईरान के अर्दबील प्रांत के नेमिन काउंटी स्थित अनबरान (Anbaran) शहर अपनी ऐतिहासिक ‘किलिम’ (Kilim) बुनाई परंपरा के लिए यूनेस्को (UNESCO) से वैश्विक मान्यता प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2020 में इस शहर की मजबूत बुनाई परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था में इसके अहम योगदान को देखते हुए इसे ईरान का ‘राष्ट्रीय किलिम शहर’ घोषित किया गया था। अब अधिकारी इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘वर्ल्ड क्राफ्ट्स सिटी’ (World Crafts City) का दर्जा दिलाने के लिए अंतिम तैयारियों में जुटे हैं।

हजारों बुनकरों का गढ़ है अनबरान

अर्दबील सांस्कृतिक विरासत विभाग के जनसंपर्क निदेशक यासर रायनाई के अनुसार, अनबरान हस्तशिल्प का एक प्रमुख केंद्र है। शहर में लगभग 5,000 हस्तशिल्प कलाकार सक्रिय हैं, जिनमें से 3,500 पंजीकृत किलिम बुनकर व्यक्तिगत या वर्कशॉप के जरिए काम कर रहे हैं। अनबरान के किलिम अपने बेहतरीन डिजाइन, रंग, गुणवत्ता और बाजार में भारी मांग के लिए जाने जाते हैं।

यूनेस्को के मानकों पर खरा उतरने की कवायद

वैश्विक मान्यता हासिल करने के लिए शहर को यूनेस्को द्वारा निर्धारित कई कड़े मापदंडों को पूरा करना है। सांस्कृतिक विरासत प्रमुख इराज सेपिडकर ने बताया कि इसके तहत कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं:

  • नामकरण: शहर की सड़कों और पार्कों के नाम किलिम से जुड़े डिजाइनों, रंगों और रूपांकनों (Motifs) के नाम पर रखे जा रहे हैं।

  • विरासत का संरक्षण: अनबरान के पारंपरिक डिजाइनों की प्रामाणिकता और मौलिकता को बचाए रखने के लिए विशेष ढांचागत विकास किया जा रहा है।

  • संस्थागत सहयोग: बुनकरों को प्रशिक्षण देने और राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अवसर प्रदान करने के लिए एक स्थायी सचिवालय की स्थापना की योजना है।

अनबरान किलिम की प्रमुख खासियतें

विशेषज्ञों के अनुसार, अनबरान किलिम उत्तर-पश्चिमी ईरान के सबसे प्रामाणिक पारंपरिक वस्त्रों में से एक है। इसकी विशिष्टता इसके निर्माण और डिजाइन में छिपी है:

  • कच्चा माल और रंग: इसे स्थानीय भेड़ों की उच्च गुणवत्ता वाली ऊन और मजीठ, अखरोट के छिलके व इंडिगो (नील) जैसे प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता है, जो इसे टिकाऊ और चमकदार बनाते हैं।

  • स्मृति आधारित बुनाई: बुनकर किसी पूर्व-निर्मित चित्र या पैटर्न का पालन करने के बजाय अपनी याददाश्त से जटिल ज्यामितीय डिजाइन उकेरते हैं।

  • पारंपरिक मोटिफ्स: इनमें लचक-ओ-तोरंज, बोटेह जेगेह और ट्यूलिप जैसे डिजाइन प्रमुख हैं, जो स्थानीय प्रतीकों और खानाबदोश संस्कृति को दर्शाते हैं।

अर्दबील प्रांत हस्तशिल्प के मामले में बेहद समृद्ध है। यहां 60 विभिन्न क्षेत्रों (जैसे चमड़े का काम, मिट्टी के बर्तन, कालीन बुनाई और कांच की कटाई) में लगभग 30,000 हस्तशिल्प कलाकार काम करते हैं, लेकिन अनबरान की किलिम बुनाई इसे वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान दिलाने जा रही है।