‘इजरायल के पास 400 परमाणु हथियार, फिर भी NPT से बाहर’: ईरान

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

वियना: ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ईरान के स्थायी मिशन ने इजरायल के परमाणु हथियारों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) में शामिल न होने के रुख को वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया है। व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) के ‘वर्किंग ग्रुप बी’ के 67वें सत्र में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इजरायल का यह रवैया वैश्विक सुरक्षा ढांचे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, NPT पर हस्ताक्षर न करने और CTBT की पुष्टि से लगातार इनकार करने के कारण इजरायल पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों (Safeguards), निगरानी और निरस्त्रीकरण से जुड़े अनिवार्य दायित्वों से बचता आ रहा है।

पश्चिम एशिया में परमाणु निरस्त्रीकरण की राह में रुकावट

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार ढांचे को मजबूत करने के किसी भी प्रयास में इजरायल के परमाणु हथियारों के मुद्दे को प्राथमिकता से शामिल किया जाए।

आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के हवाले से ईरानी पक्ष ने कहा कि इजरायल के जखीरे में लगभग 200 से 400 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इसके साथ ही वह पश्चिम एशिया में गैर-पारंपरिक और सामूहिक विनाश के हथियारों (WMDs) का एकमात्र धारक है। इसके बावजूद इजरायल न तो अपनी परमाणु साइटों के अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देता है और न ही NPT पर हस्ताक्षर करने को तैयार है। ईरान के उप विदेश मंत्री ने इसे पश्चिम एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की राह में सबसे गंभीर बाधा करार दिया है।

अमेरिकी परमाणु परीक्षण की तैयारियों पर कड़ी आपत्ति

CTBTO की बैठक में ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा परमाणु हथियारों के परीक्षण की तैयारी के हालिया आदेश की भी कड़े शब्दों में निंदा की। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इसे एक बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कदम बताते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

ईरान का कहना है कि यह आदेश CTBT, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वैश्विक अप्रसार नियमों की खुली अनदेखी है। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यद्यपि व्यावहारिक रूप से अभी कोई परीक्षण नहीं हुआ है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े परमाणु जखीरे वाले देश द्वारा इस तरह का आदेश जारी करना एक राजनीतिक बयान से कहीं अधिक गंभीर परिणाम रखता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस खतरे से निपटने के लिए किसी वास्तविक परमाणु विस्फोट का इंतजार नहीं करना चाहिए।

‘ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण’

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि इजरायल के विपरीत ईरान NPT का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग करता आ रहा है।

मिशन ने जोर देकर कहा कि ईरान की सभी परमाणु इकाइयां और संयंत्र पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी के दायरे में हैं और देश की परमाणु गतिविधियां केवल NPT के शांतिपूर्ण दायरे में संचालित होती हैं। इसके साथ ही ईरान ने अपने ऊपर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों को ‘स्टेट टेररिज्म’ और मानवता के खिलाफ अपराध करार देते हुए इसे वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया।

तनाव और कूटनीतिक समझौतों की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमलों का एक नया दौर शुरू किया था, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन्स से जवाबी कार्रवाई की थी। बाद में 7 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ और 18 जून को ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों ने विवादों के कूटनीतिक समाधान के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय करते हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, समझौते के कुछ ही हफ्तों बाद नए हमलों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है।