RGHS में खेल? 50 अस्पताल, 60 डॉक्टर और 479 संदिग्ध क्लेम की जांच

जयपुर: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। योजना के तहत महंगी जांचों के लिए जरूरी प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया से बचने के लिए कुछ निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों की जांच को अलग-अलग चरणों में कराने और क्लेम को बांटकर पेश करने की आशंका जताई गई है।
RGHS के डेटा विश्लेषण के दौरान सिर्फ एक महीने में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। शुरुआती जांच में करीब 50 निजी अस्पताल और 60 डॉक्टर जांच के दायरे में आए हैं।
महंगी जांच के लिए प्रक्रिया से बचने का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ अस्पतालों ने एक ही बीमारी के इलाज के दौरान मरीजों को अलग-अलग तारीखों पर अस्पताल बुलाया। आरोप है कि एक ही मरीज की जांचों को एक साथ कराने के बजाय उन्हें अलग-अलग चरणों में कराया गया।
इसका मकसद कथित तौर पर उन जांचों पर लागू होने वाली प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया से बचना और अलग-अलग क्लेम के जरिए भुगतान हासिल करना हो सकता है।
RGHS अधिकारियों के मुताबिक, यदि जांच में यह साबित होता है कि अस्पतालों ने जानबूझकर जांच या क्लेम को इस तरह बांटा था, तो यह योजना के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
एक मरीज को 3 से 4 बार अस्पताल बुलाने का मामला
जांच में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें मरीजों को एक ही बीमारी के इलाज के दौरान तीन से चार बार तक अस्पताल बुलाया गया।
अलग-अलग तारीखों पर जांच कराने के कारण मरीजों को बार-बार अस्पताल पहुंचना पड़ा। इसका असर खास तौर पर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ने की बात सामने आई है।
जयपुर, जोधपुर समेत इन जिलों में सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले
RGHS के डेटा विश्लेषण में सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर से सामने आए हैं।
इन जिलों में सामने आए मामलों को लेकर RGHS की टीमें अस्पतालों के दावों और मरीजों की मेडिकल जांच से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं।
जांच के दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड, मरीजों की जांच रिपोर्ट, इलाज की तारीखों और क्लेम से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अलग-अलग तारीखों पर कराई गई जांचें वास्तव में चिकित्सकीय रूप से जरूरी थीं या भुगतान प्रक्रिया से बचने के लिए उन्हें जानबूझकर अलग किया गया।
डेटा एनालिसिस से खुला मामला
RGHS में लगातार किए जा रहे डेटा विश्लेषण के दौरान संदिग्ध पैटर्न सामने आए। सिर्फ एक महीने के आंकड़ों में 479 ऐसे मामले चिन्हित किए गए, जो 238 लाभार्थियों से जुड़े हैं।
इसके बाद संदिग्ध अस्पतालों और डॉक्टरों की पहचान कर रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।
गड़बड़ी साबित हुई तो अस्पतालों पर कार्रवाई
RGHS प्रशासन अब इन मामलों की विस्तृत जांच कर रहा है। अगर रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि किसी अस्पताल या डॉक्टर ने जानबूझकर प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जांचों या क्लेम को बांटा, तो संबंधित अस्पताल और चिकित्सकों के खिलाफ योजना के नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
RGHS के सामने दोहरी चुनौती
RGHS का उद्देश्य राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के तहत अनावश्यक जांच, बार-बार अस्पताल बुलाने या क्लेम प्रक्रिया में संभावित हेरफेर के आरोप व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं।
