भड़का ईरान, कहा- ‘आर्थिक आतंकवाद’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की ओर से लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। तेहरान ने इन प्रतिबंधों को “आर्थिक आतंकवाद” और “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि Washington की यह कार्रवाई ईरानी लोगों के खिलाफ दशकों पुरानी शत्रुता की निरंतरता है।

गुरुवार को जारी बयान में ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि नए प्रतिबंधों की घोषणा 1953 में ईरान में हुए तख्तापलट की बरसी पर की गई। मंत्रालय के मुताबिक, इससे अमेरिकी नीति में ईरान के प्रति लंबे समय से जारी दबाव और शत्रुता का संकेत मिलता है।

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ ‘सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई’ का दावा किया

ईरानी विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई प्रतिबंध नीति के ऐलान के एक दिन बाद आई। बुधवार को ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को “most crushing economic operation” बताया और कहा कि तेहरान को अभूतपूर्व स्तर के “economic warfare and isolation” का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने उन देशों के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी जो ईरान के साथ कारोबार करेंगे। तेहरान ने इस नीति को आर्थिक दबाव के जरिए ईरानी सरकार और जनता को झुकाने की कोशिश बताया है।

ईरान ने कहा, प्रतिबंध ‘मानवता के खिलाफ अपराध’

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध आम ईरानी नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ऐसे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं।

बयान में कहा गया कि ईरान पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध “आर्थिक आतंकवाद” और “मानवता के खिलाफ अपराध” की श्रेणी में आते हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

ईरान ने नए प्रतिबंधों को पिछले करीब डेढ़ साल में अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए दबाव और सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में रखा है। मंत्रालय का दावा है कि इन कार्रवाइयों के बावजूद ईरानी जनता ने आत्मसमर्पण नहीं किया है।

‘आर्थिक दबाव और सैन्य युद्ध एक ही सिक्के के दो पहलू’

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नीति पर हमला करते हुए कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव सैन्य युद्ध तथा आक्रामकता के दूसरे रूप हैं।

मंत्रालय ने कहा कि Washington की ओर से सैन्य और आर्थिक दोनों तरह के दबाव का इस्तेमाल वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर रहा है।

तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का समर्थन करने वाले देशों से भी अपील की कि वे अमेरिकी कार्रवाई पर चुप न रहें। ईरान ने खास तौर पर राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान का हवाला दिया।

‘प्रतिबंधों की नीति पहले भी विफल रही’

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की प्रतिबंध नीति पहले भी आजमाई जा चुकी है और उसके मुताबिक यह विफल रही है। मंत्रालय ने नए प्रतिबंधों को उसी नीति की पुनरावृत्ति बताया।

बयान में कहा गया कि इस नीति को दोबारा आजमाने से अतीत की विफलताओं की पुनरावृत्ति होगी और इसके जिम्मेदार लोगों की स्थिति और खराब होगी।

ईरान ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव के बावजूद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरान बोला, ‘सभी उपलब्ध साधनों’ का इस्तेमाल करेंगे

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के पास राष्ट्रीय क्षमताओं और दशकों के प्रतिरोध का अनुभव है। उसके मुताबिक, देश अमेरिका के दबाव, हस्तक्षेप, सैन्य कार्रवाई और कथित राज्य प्रायोजित आतंकवाद का सामना करता रहा है।

मंत्रालय ने कहा कि Islamic Republic of Iran अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी साधनों और क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा।

तेहरान ने अमेरिकी और इजराइली कार्रवाइयों को अपने खिलाफ शत्रुतापूर्ण कदम बताते हुए कहा कि उसका प्राथमिक लक्ष्य राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वतंत्रता, गरिमा और संप्रभुता की रक्षा करना है।