ईरान का अमेरिका पर बड़ा हमला, मौजूदगी का मकसद सिर्फ संसाधनों की लूट

945d28f2-f4c6-4198-ada2-6a4b254f060c
अजमल शाह
अजमल शाह

बगदाद: ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र कलीबाफ ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को बगदाद में इराक के राष्ट्रपति नज़ार मोहम्मद सईद अमीदी से मुलाकात के दौरान कलीबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका की क्षेत्र में मौजूदगी का उद्देश्य सुरक्षा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संसाधनों पर नियंत्रण और उनकी लूट है।

कलीबाफ ने कहा कि हालिया संघर्ष के अनुभव ने क्षेत्रीय देशों को यह दिखाया है कि विदेशी सैन्य मौजूदगी सुरक्षा की गारंटी देने के बजाय अस्थिरता बढ़ाती है। उन्होंने अमेरिका पर क्षेत्रीय शांति को बाधित करने वाला पक्ष होने का आरोप लगाया।

अमेरिका पर सीधा निशाना

कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ने फारस की खाड़ी और आसपास के देशों के साथ अपने संबंधों को मुख्य रूप से उनके संसाधनों से जोड़कर देखा है। उनके मुताबिक, हालिया युद्ध ने यह साबित किया कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है।

ईरानी संसद के स्पीकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच युद्धविराम के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है। इससे एक दिन पहले कलीबाफ ने कहा था कि ईरान तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़ी ईरान की शर्तों को पूरा नहीं करता।

ईरान-इराक एकजुटता पर जोर

इराकी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान कलीबाफ ने दोनों देशों के रिश्तों को भी रेखांकित किया। उन्होंने इराकी जनता और नेतृत्व का समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि ईरान और इराक मुश्किल दौर में एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

कलीबाफ ने दोनों देशों के अतीत का उल्लेख करते हुए सद्दाम हुसैन के शासनकाल और ईरान-इराक युद्ध की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दोनों देशों के बीच सहयोग का नया आधार तैयार हुआ है।

उनकी बगदाद यात्रा का घोषित एजेंडा भी केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों, सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है।

युद्ध के बाद ‘नए क्षेत्रीय क्रम’ की बात

कलीबाफ ने क्षेत्र में एक नए राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर भी जोर दिया। बगदाद पहुंचने के बाद उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप से अलग क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की बात कही।

यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब इराक खुद मुश्किल संतुलन से गुजर रहा है। एक तरफ बगदाद पर अमेरिका का दबाव है कि वह ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को निरस्त्र करे, वहीं इराक के राजनीतिक और सुरक्षा तंत्र में ईरान का प्रभाव भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

ईरान-इराक के बीच आर्थिक कनेक्शन पर भी जोर

कलीबाफ ने सुरक्षा के साथ-साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने शालामचेह-बसराह रेलवे, अरवंद रुड जलमार्ग की ड्रेजिंग और सीमा बाजारों के विस्तार जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

ईरानी पक्ष का तर्क है कि इस तरह की परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन बढ़ाने के साथ बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती हैं।

इराक ने कहा- ‘नो वॉर, नो पीस’ की स्थिति खत्म हो

इराकी राष्ट्रपति नज़ार अमीदी ने हालिया अमेरिकी-इजरायली हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इनसे इराक और पूरे क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने ईरान और इराक को एक साझा समाज से जुड़े दो देशों के रूप में पेश किया और कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा का आधार क्षेत्र के देशों की सामूहिक सुरक्षा होनी चाहिए।

अमीदी ने ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा ‘नो वॉर, नो पीस’ स्थिति को समाप्त करने की जरूरत भी बताई। उनके मुताबिक, इराक क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन में ईरान के साथ खड़ा रहेगा।

कलीबाफ की बगदाद यात्रा क्यों अहम?

कलीबाफ की बगदाद यात्रा ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव, होर्मुज संकट और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को लेकर दबाव एक साथ मौजूद हैं। उनकी यात्रा में इराकी संसद के स्पीकर हैबत अल-हल्बूसी और प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी से भी मुलाकात शामिल रही।