राजभर से मुलाकात के दावे पर कांग्रेस का वार, गौतम बोले- ‘तस्वीर दिखा दें’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। गठबंधन की संभावित रणनीति, सीटों के बंटवारे और सामाजिक समीकरणों को लेकर दलों के बीच बयानबाजी भी बढ़ रही है। इसी बीच यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से संपर्क या मुलाकात का संकेत दिया था।
राजेंद्र पाल गौतम ने साफ कहा कि उनकी राजभर से अब तक न कोई मुलाकात हुई है और न ही फोन पर बातचीत हुई है। उन्होंने राजभर के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, “वो मुलाकात की तस्वीर दिखा दें। पता नहीं वो ऐसा क्यों बोल रहे हैं। मेरी अभी तक न उनसे मुलाकात हुई है और न ही फोन पर बात हुई है।”
राजभर के दावे पर सीधा जवाब
यूपी की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर लगातार गठबंधन और राजनीतिक समीकरणों को लेकर बयान देते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस प्रभारी का यह बयान दोनों नेताओं के बीच संपर्क की चर्चाओं पर सीधा विराम लगाता है।
गौतम ने अपने बयान में किसी तरह की मुलाकात या बातचीत से इनकार किया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कांग्रेस की ओर से राजभर के साथ किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है।
सितंबर से सीट शेयरिंग पर बातचीत
विपक्षी गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि बातचीत सितंबर से शुरू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर तक सीटों पर सहमति बनाने और इसके बाद टिकट वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक गठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत जल्द शुरू होगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कांग्रेस कितनी सीटों पर दावा करेगी।
‘सम्मानजनक समझौता होना चाहिए’
सीट बंटवारे के सवाल पर गौतम ने ‘सम्मानजनक’ समझौते की बात कही। उन्होंने कहा कि संख्या में थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे संभव है, लेकिन कांग्रेस का लक्ष्य सरकार बनाना है।
उन्होंने अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रमुख चेहरा बताते हुए कहा, “हम अखिलेश यादव के चेहरे को आगे बढ़ाकर चल रहे हैं। कांग्रेस बड़ा दिल रखती है, उम्मीद है कि वे भी बड़ा दिल रखेंगे।”
इस बयान से कांग्रेस की मौजूदा रणनीति का संकेत मिलता है। पार्टी फिलहाल गठबंधन में रहते हुए मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर अलग दावा करने के बजाय अखिलेश यादव के नेतृत्व को स्वीकार करने की बात कर रही है, लेकिन सीटों के बंटवारे में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए ‘सम्मानजनक’ हिस्से पर जोर दे रही है।
2017 जितनी सीटें मिलेंगी?
जब गौतम से पूछा गया कि क्या कांग्रेस 2017 विधानसभा चुनाव के आसपास सीटों की मांग कर रही है, तो उन्होंने सीधे कोई संख्या बताने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “सम्मानजनक शब्द से आप अंदाजा लगा सकते हैं।”
यानी कांग्रेस ने अभी अपनी मांग का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। सीट शेयरिंग की वास्तविक तस्वीर सितंबर में बातचीत शुरू होने के बाद ही साफ होने की संभावना है।
जाति जनगणना पर केंद्र पर निशाना
गौतम ने कहा, “जाति जनगणना पूरे देश में बड़ा मुद्दा बनने वाली है। मोदी सरकार को इसका एहसास नहीं है। जाति जनगणना में ओबीसी का कॉलम नहीं दिया गया है।”
जाति जनगणना का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में खास महत्व रखता है, क्योंकि राज्य में पिछड़े वर्गों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक हिस्सेदारी लंबे समय से चुनावी विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। विपक्षी दल इसे सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़ते रहे हैं।
गठबंधन के सामने अब सीटों की बड़ी परीक्षा
यूपी में विपक्षी गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ बीजेपी के खिलाफ साझा मोर्चा बनाए रखने की नहीं, बल्कि सीटों का ऐसा बंटवारा करने की है जिससे सहयोगी दलों के बीच चुनाव से पहले ही खींचतान न बढ़े।
राजेंद्र पाल गौतम का सितंबर से बातचीत शुरू होने और अक्टूबर तक सहमति बनाने का बयान बताता है कि गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर शुरुआती टाइमलाइन तय करने की कोशिश हो रही है। लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों की संख्या पर वास्तविक सहमति कितनी जल्दी बनती है, यही अगले चरण की सबसे अहम राजनीतिक परीक्षा होगी।
