RSS की जैश और तालिबान से तुलना, हरिप्रसाद के बयान पर बवाल

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

बेंगलुरु: कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने आरएसएस को लेकर दिए बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरिप्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से की।

हरिप्रसाद ने दावा किया कि जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान और आरएसएस भारत में पंजीकृत नहीं हैं और इसी आधार पर उन्होंने कहा कि इन संगठनों में अंतर नहीं है।

देशभक्ति पर RSS को घेरा

हरिप्रसाद ने आरएसएस पर सिर्फ पंजीकरण को लेकर सवाल नहीं उठाया, बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर भी निशाना साधा। वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने दावा किया कि आरएसएस से जुड़े लोग वंदे मातरम, राष्ट्रगान नहीं गाते और तिरंगा नहीं फहराते।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव तेज है। इसी विवाद के बीच कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ कथित तौर पर वंदे मातरम के गायन में व्यवधान पैदा करने को लेकर एफआईआर दर्ज होने का मुद्दा भी कांग्रेस लगातार उठा रही है।

RSS के रजिस्ट्रेशन पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने

आरएसएस के कानूनी पंजीकरण का मुद्दा अब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बन गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष ने हाल में हिंदू जागरण वेदिके के अखंड भारत संकल्प दिवस कार्यक्रम में आरएसएस के पंजीकरण को लेकर कहा था कि संघ को किसी वैधानिक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।

संतोष के मुताबिक, आरएसएस 1925 से काम कर रहा है और उसकी पहचान किसी सरकारी प्रमाणपत्र से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से बनी है। उन्होंने यह भी कहा था कि देश के विभाजन और विभिन्न संकटों के दौरान संघ की भूमिका के लिए किसी सरकारी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं थी।

कांग्रेस अब इसी तर्क को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर सवाल उठा रही है।

प्रियंक खरगे ने संपत्ति और चंदे पर उठाए सवाल

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने भी आरएसएस के कानूनी दर्जे को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने पूछा कि आरएसएस किस भारतीय कानून के तहत अस्तित्व में है और देशभर में उसकी संपत्तियां किसके नाम पर हैं।

खरगे ने संघ के बैंक खातों, गुरु दक्षिणा के रूप में मिलने वाले चंदे, ऑडिटेड अकाउंट्स और टैक्स फाइलिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उनका तर्क है कि किसी संगठन का लंबे समय तक अस्तित्व में रहना उसकी कानूनी और वित्तीय पारदर्शिता के सवाल को खत्म नहीं करता।

कांग्रेस ने देशभक्ति के प्रमाणपत्र से किया इनकार

प्रियंक खरगे ने कांग्रेस की देशभक्ति पर बीजेपी और आरएसएस की ओर से सवाल उठाए जाने को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए बीजेपी, आरएसएस, बीजेपी युवा मोर्चा या एबीवीपी से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।

खरगे ने आरएसएस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संगठन के राजनीतिक मार्गदर्शकों ने लंबे समय तक तिरंगा नहीं फहराया। यह आरोप कांग्रेस और आरएसएस के बीच पुराने वैचारिक विवाद को फिर सामने लाता है।

वंदे मातरम विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

वंदे मातरम को लेकर विवाद अब केवल राष्ट्रीय गीत के गायन तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों इसे अपनी-अपनी राजनीतिक और वैचारिक स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे राष्ट्रीय प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल से जोड़ रही है, वहीं बीजेपी की ओर से कांग्रेस नेताओं के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।