मोदी कैबिनेट में जल्द विस्तार? आठवले के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

नागपुर: मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द विस्तार की अटकलों के बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने बड़ा दावा किया है। आठवले ने 17 अगस्त 2026 को नागपुर में कहा कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम के ऐलान के बाद केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है।

आठवले के मुताबिक, संभावित विस्तार में बीजेपी के साथ उसके सहयोगी दलों के कुछ नए चेहरों को सरकार में जगह मिल सकती है।

शरद पवार को NDA में आने का न्योता

आठवले ने इसी बयान के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार को भी एनडीए में शामिल होने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि पवार अपने वैचारिक मतभेदों को अलग रखकर एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।

आठवले ने इससे आगे बढ़ते हुए कहा कि अगर शरद पवार खुद एनडीए में आने के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो उनकी पार्टी के आठ लोकसभा सांसद देशहित में स्वतंत्र फैसला लेकर एनडीए के साथ आ सकते हैं। शरद पवार के एनडीए में आने की अपील आठवले पहले भी कर चुके हैं। जुलाई 2026 में भी उन्होंने पवार को एनडीए में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी के आठ सांसद गठबंधन को मजबूत कर सकते हैं।

NCP का पलटवार

आठवले के बयान पर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आठवले को ‘शेखचिल्ली’ बताते हुए उनके बयानों पर तंज कसा।

क्रास्टो ने आरोप लगाया कि आठवले की कोई स्थिर राजनीतिक विचारधारा नहीं है और वे सत्ता में बने रहने के लिए इस तरह के बयान देते हैं।

अभिजीत दीपके को RPI(A) में शामिल होने का ऑफर

आठवले ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि दीपके बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अधूरे सपनों और समाज के हित में काम करने के लिए उनकी पार्टी के साथ आ सकते हैं।

आरक्षण पर भी आठवले का सख्त रुख

आठवले ने आरक्षण खत्म करने की मांगों को लेकर भी कड़ा रुख जताया। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की कृपा नहीं बल्कि संविधान से मिला अधिकार है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि संविधान में दिए गए आरक्षण को खत्म करने या कमजोर करने की वकालत करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

“हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।”