अमिताभ की आवाज, शंकर के सुर और कहानी; देखिए ‘खाकी का सितारा’
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पुलिस की पहचान आमतौर पर सायरन, वर्दी और कानून के कठोर चेहरे से होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस पहचान को एक अलग अंदाज में सामने रखने की कोशिश की है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यूपी पुलिस का पहला आधिकारिक गान ‘खाकी का सितारा’ अब पूरे वीडियो के साथ जारी हो गया है। करीब साढ़े छह मिनट के इस एंथम में पुलिस की ड्यूटी को सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि महिला सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा राहत, तकनीकी पुलिसिंग और जनसेवा जैसे कई पहलुओं को एक साथ पिरोया गया है। इसे खास बनाती है अमिताभ बच्चन की आवाज, शंकर महादेवन का संगीत और स्वर तथा कवि-गीतकार आलोक श्रीवास्तव के शब्द।
14 अगस्त को हुआ लॉन्च
एंथम का औपचारिक लॉन्च 14 अगस्त को लखनऊ स्थित लोक भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। कार्यक्रम में फिल्म और संगीत जगत की हस्तियां भी मौजूद रहीं। इस मौके पर गान को यूपी पुलिस की संस्थागत पहचान और उसके सेवा भाव को सामने रखने वाली रचना के तौर पर पेश किया गया। वीडियो के जरिए पुलिस की रोजमर्रा की ड्यूटी से लेकर बड़े आयोजनों और संकट की परिस्थितियों तक की तस्वीरें दर्शकों के सामने रखी गई हैं।
अमिताभ की आवाज में ‘खाकी’
एंथम के रिलीज होने के बाद अमिताभ बच्चन ने भी इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा, “कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं… कुछ खाकी पहनकर जमीन पर। खाकी का सितारा।” यह पंक्ति पूरे वीडियो की थीम को एक वाक्य में समेट देती है। यहां ‘सितारा’ किसी फिल्मी चमक का प्रतीक नहीं, बल्कि उस पुलिसकर्मी के लिए इस्तेमाल किया गया है जो वर्दी में रहते हुए सुरक्षा और सेवा की जिम्मेदारी निभाता है।
एक साल की शूटिंग, एक वीडियो में कई चेहरे
यूपी पुलिस के अनुसार, इस एंथम का वीडियो कुछ दिनों में तैयार किया गया प्रोजेक्ट नहीं है। इसकी शूटिंग महाकुंभ-2025 से लेकर स्वतंत्रता दिवस-2026 तक अलग-अलग मौकों और स्थानों पर की गई। इस दौरान पुलिस की ड्यूटी, भीड़ प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, जनसंपर्क, राहत एवं बचाव कार्य और अन्य अभियानों से जुड़े दृश्य रिकॉर्ड किए गए। बाद में इन्हें एक संपूर्ण वीडियो के रूप में तैयार किया गया। इस लिहाज से ‘खाकी का सितारा’ एक गीत से आगे बढ़कर यूपी पुलिस की करीब एक साल की दृश्यात्मक झलक पेश करता है।
सिर्फ डंडा और कानून नहीं
वीडियो का फोकस पुलिस के उस हिस्से पर भी है जो अक्सर अपराध की खबरों के पीछे छिप जाता है। महिला सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, तकनीकी पुलिसिंग और आम नागरिकों की सहायता से जुड़े दृश्य पुलिस की भूमिका को व्यापक संदर्भ में दिखाते हैं। संदेश साफ है कि पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ अपराधी पकड़ने तक खत्म नहीं होती। सड़क पर यातायात संभालने से लेकर आपदा के दौरान राहत पहुंचाने तक उसकी मौजूदगी नागरिक जीवन के कई स्तरों पर होती है।
योगी का जोर: सख्ती और संवेदनशीलता
एंथम लॉन्च के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की भूमिका में सख्ती और संवेदनशीलता के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “जहां वीरता होगी, वहां संवेदनशीलता भी होगी। लेकिन जहां वीरता नहीं होती, वहां असुरक्षा और अराजकता पैदा होती है।” मुख्यमंत्री ने अपराध और अपराधियों के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख करते हुए महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को भी पुलिस की प्राथमिकता बताया।
यही वह बिंदु है जहां एंथम को केवल प्रचारात्मक प्रस्तुति के बजाय पुलिस की अपेक्षित कार्यशैली के संदेश से जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि किसी गीत या वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें पुलिसिंग के वास्तविक प्रदर्शन का स्वतंत्र प्रमाण नहीं होतीं। उसका मूल्यांकन कानून-व्यवस्था के आंकड़ों, शिकायत निवारण, अपराध नियंत्रण और नागरिक अनुभव जैसे अलग-अलग मानकों पर ही किया जा सकता है।
शंकर महादेवन के लिए भी खास
एंथम के संगीत और स्वर से जुड़े शंकर महादेवन ने इसे अपने तीन दशक लंबे करियर के यादगार अनुभवों में से एक बताया। पद्मश्री से सम्मानित महादेवन ने कहा कि यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि खाकी वर्दी के प्रति सम्मान और भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम है। उनकी आवाज और संगीत ने इसे पारंपरिक पुलिस गीत के बजाय एक सिनेमाई प्रस्तुति का स्वरूप दिया है।
नाना पाटेकर और करण आनंद भी जुड़े
लॉन्च समारोह में मुख्यमंत्री के अलावा नाना पाटेकर, शंकर महादेवन, गीतकार आलोक श्रीवास्तव और अभिनेता करण आनंद सहित फिल्म एवं संगीत जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। वीडियो में करण आनंद ने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है। इस तरह प्रोजेक्ट में वास्तविक पुलिस ड्यूटी के दृश्यों के साथ पेशेवर मनोरंजन उद्योग की प्रस्तुति भी जोड़ी गई है।
वर्दी के पीछे का चेहरा
‘खाकी का सितारा’ का केंद्रीय विचार पुलिस की वर्दी को केवल अधिकार और शक्ति के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा से जोड़ना है। कैमरा कभी कानून-व्यवस्था संभालते पुलिसकर्मियों पर जाता है, तो कभी राहत और बचाव में जुटी टीम पर। यही बदलाव वीडियो को एक संस्थागत एंथम का स्वर देता है, जहां संदेश पुलिस के अधिकार से ज्यादा उसकी जिम्मेदारी पर केंद्रित दिखाई देता है।
एंथम से आगे की कहानी
किसी भी संस्थान का गीत उसकी पहचान को मजबूत कर सकता है, लेकिन पुलिस की असली कहानी उसके मैदान में किए गए काम से लिखी जाती है। ‘खाकी का सितारा’ उस कहानी का एक सिनेमाई संस्करण है। इसमें यूपी पुलिस ने अपने कई चेहरों को एक साथ दिखाने की कोशिश की है। अब इस गान की चमक से अलग असली कसौटी वही रहेगी जो हर पुलिस व्यवस्था की होती है: संकट में उसकी तत्परता, कानून के सामने उसकी निष्पक्षता और आम नागरिक के साथ उसका व्यवहार। वर्दी पर लगा सितारा तभी अर्थपूर्ण होता है जब उसके पीछे की सेवा भी उतनी ही दिखाई दे।
