ट्रंप की लोकप्रियता क्यों गिरी? 80% अमेरिकी बोले, ईरान युद्ध लंबा चलेगा

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किल अब सिर्फ वॉशिंगटन की राजनीतिक गलियों तक सीमित नहीं दिख रही है। ताजा Reuters/Ipsos सर्वे में उनके कामकाज को मंजूरी देने वाले अमेरिकी नागरिकों की संख्या घटकर 33% रह गई है, जबकि 64% ने उनके प्रदर्शन को अस्वीकार किया है। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण वह आंकड़ा है जो ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर अमेरिकी जनमत की तस्वीर सामने रखता है: 80% अमेरिकी मानते हैं कि यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।

33% पर ट्रंप

चार दिन चले इस सर्वे का निष्कर्ष ट्रंप के लिए इसलिए अहम है क्योंकि उनकी approval rating इस महीने की शुरुआत के 35% से और नीचे चली गई है। 33% का आंकड़ा उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर बताया गया है। हालांकि, इसे केवल ईरान संघर्ष का सीधा परिणाम मानना जल्दबाजी होगी। राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर अर्थव्यवस्था, महंगाई, घरेलू राजनीति और विदेश नीति समेत कई मुद्दों का असर पड़ता है।

लेकिन सर्वे का दूसरा आंकड़ा इस समय ट्रंप प्रशासन के सामने मौजूद एक खास चुनौती को जरूर रेखांकित करता है।

80% को लंबी लड़ाई की आशंका

सर्वे में 80% लोगों ने कहा कि अमेरिका की ईरान में भागीदारी लंबे समय तक जारी रह सकती है। यह चिंता सिर्फ डेमोक्रेट मतदाताओं तक सीमित नहीं है। ऐसे मानने वालों में 87% डेमोक्रेट और 71% रिपब्लिकन शामिल हैं। इसके उलट केवल 16% अमेरिकी मानते हैं कि संघर्ष कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो सकता है।

यही अंतर ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। किसी सैन्य अभियान को लेकर जनता की शुरुआती प्रतिक्रिया और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष को लेकर उसका नजरिया अलग हो सकता है। जैसे-जैसे लड़ाई लंबी होती है, सवाल सैन्य कार्रवाई के उद्देश्य से आगे बढ़कर उसकी कीमत और परिणामों तक पहुंचने लगते हैं।

सिर्फ युद्ध नहीं, जेब का सवाल

ईरान संघर्ष का असर अमेरिकी जनता के लिए केवल विदेश नीति का विषय नहीं है। Strait of Hormuz के आसपास तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है और तेल बाजार में चिंता बढ़ाई है। अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर इसका असर घरेलू राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।

यहीं से विदेश नीति और घरेलू राजनीति एक-दूसरे से जुड़ती हैं। युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, ऊर्जा कीमतों, सरकारी खर्च और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उतने ही गंभीर हो सकते हैं। यह कहना अभी अलग बात है कि इन्हीं कारणों ने ट्रंप की approval rating को 33% तक पहुंचाया है। उपलब्ध सर्वे इस संबंध को सीधे साबित नहीं करता।

रिपब्लिकन वोटर भी चिंतित

इस सर्वे का शायद सबसे उल्लेखनीय पहलू रिपब्लिकन मतदाताओं का रुख है। ईरान संघर्ष के लंबे खिंचने की आशंका जताने वाले रिपब्लिकन मतदाताओं का आंकड़ा 71% है। इसका अर्थ यह नहीं है कि 71% रिपब्लिकन युद्ध के विरोध में हैं। सवाल संघर्ष की संभावित अवधि को लेकर था। लेकिन राजनीतिक तौर पर यह संकेत जरूर देता है कि युद्ध को लेकर चिंता पार्टी की एक सीमा के बाहर भी मौजूद है।

ट्रंप के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नवंबर के midterm elections की ओर बढ़ते अमेरिका में विदेश नीति के फैसलों का असर घरेलू राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब मतदाता सुरक्षा के साथ-साथ रोजमर्रा की आर्थिक लागत को भी चुनावी फैसले में शामिल करते हैं।

‘युद्ध इसके लायक था?’

सर्वे में केवल करीब एक-पांचवां अमेरिकी यह मानता है कि ईरान के खिलाफ युद्ध इसके लायक था। यह आंकड़ा संघर्ष के राजनीतिक समर्थन को समझने में महत्वपूर्ण है। जनता का किसी सैन्य कार्रवाई के लंबे समय तक चलने की आशंका जताना और उसे सही मानना दो अलग-अलग बातें हैं।

यही वह जगह है जहां ट्रंप प्रशासन की चुनौती दिखाई देती है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो सरकार को सिर्फ सैन्य अभियान की प्रगति नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य, लागत और संभावित निकास रणनीति के बारे में भी जनता को जवाब देना होगा।

60 दिन की खिड़की पर सवाल

इस बीच बातचीत के लिए तय 60 दिन की अवधि समाप्त होने की खबरों ने कूटनीतिक मोर्चे को भी चर्चा में ला दिया है। यदि सैन्य कार्रवाई और बातचीत समानांतर चल रही हों, तो किसी भी प्रशासन के लिए दोनों मोर्चों के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन होता है।

अमेरिकी राजनीति में इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि जनता से अंततः एक सीधा सवाल पूछा जाता है: यह संघर्ष किस लक्ष्य के लिए है और इसका अंत किस शर्त पर होगा?

ट्रंप के सामने असली परीक्षा

33% approval अपने आप में किसी राष्ट्रपति की राजनीतिक हार का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब इसके साथ 64% disapproval, संघर्ष के लंबा चलने की आशंका जताने वाले 80% अमेरिकी और युद्ध को सही ठहराने वाले केवल लगभग 20% लोग दिखाई देते हैं, तो तस्वीर को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

आने वाले दिनों में असली कसौटी आंकड़ों से ज्यादा घटनाएं तय करेंगी। क्या ईरान संघर्ष सीमित रहता है या फैलता है? ऊर्जा कीमतें किस दिशा में जाती हैं? बातचीत का रास्ता खुलता है या बंद होता है? और सबसे महत्वपूर्ण, अमेरिकी मतदाता युद्ध की कीमत को अपनी घरेलू प्राथमिकताओं के मुकाबले कितना महत्व देते हैं?

फिलहाल एक बात साफ है। ट्रंप के लिए ईरान का मोर्चा अब केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं रह गया है। यह अमेरिकी जनता के भरोसे, अर्थव्यवस्था और आने वाले चुनावी माहौल की भी परीक्षा बनता जा रहा है।