होर्मुज पर अमेरिका की ताकत बेअसर? Pentagon के दावे ने बढ़ाई चिंता

फारस की खाड़ी में युद्ध की सबसे बड़ी लड़ाई शायद समुद्र में नहीं, बल्कि उस संकरे जलमार्ग पर रणनीतिक नियंत्रण की है, जहां से दुनिया के ऊर्जा कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। Press TV के हवाले से सामने आए एक क्षेत्रीय खुफिया स्रोत के दावे के मुताबिक, Pentagon ने आकलन किया है कि फिलहाल अमेरिका के पास ऐसी कोई सैन्य योजना नहीं है जो Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और क्षेत्रीय ऊर्जा स्थिरता की गारंटी दे सके। अगर यह आकलन स्वतंत्र रूप से पुष्ट होता है, तो यह अमेरिकी सैन्य रणनीति के सामने एक गंभीर चुनौती की तस्वीर पेश करेगा।
होर्मुज क्यों बना सबसे बड़ा मोर्चा
Strait of Hormuz ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसका महत्व असाधारण है। यहां किसी लंबे व्यवधान का असर केवल खाड़ी के देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तेल, गैस, शिपिंग और बीमा बाजारों के जरिए दुनिया की अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इस जलमार्ग को लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था का रणनीतिक chokepoint माना जाता रहा है।
मौजूदा टकराव ने इस भौगोलिक वास्तविकता को फिर सामने ला दिया है। अमेरिका के पास अत्याधुनिक नौसैनिक क्षमता है, लेकिन सैन्य ताकत और किसी समुद्री मार्ग को लगातार सुरक्षित रखने की क्षमता एक ही बात नहीं है। होर्मुज की भौगोलिक संरचना, तट से उसकी निकटता और क्षेत्र में मौजूद सैन्य क्षमताएं किसी भी संभावित ऑपरेशन को बेहद जटिल बनाती हैं।
Pentagon के नाम पर क्या दावा सामने आया
Press TV से बातचीत में एक क्षेत्रीय खुफिया अधिकारी ने दावा किया कि Pentagon के आकलन के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में कोई सैन्य योजना ऐसी नहीं है जो होर्मुज को खुला रखने, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय ऊर्जा स्थिरता बनाए रखने की राजनीतिक तथा सुरक्षा क्षमता रखती हो।
यहां सबसे महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। यह आकलन Press TV को दिए गए एक क्षेत्रीय खुफिया स्रोत के दावे पर आधारित है। उपलब्ध सामग्री में Pentagon की ओर से इस कथित आकलन की सार्वजनिक पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है। इसलिए इसे अमेरिकी रक्षा विभाग का आधिकारिक बयान मानना उचित नहीं होगा।
सैन्य ताकत बनाम भौगोलिक हकीकत
अगर स्रोत का दावा सही साबित होता है, तो यह सवाल उठता है कि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में शामिल अमेरिका एक संकरे समुद्री मार्ग पर पूर्ण सुरक्षा की गारंटी क्यों नहीं दे पा रहा है। इसका जवाब केवल हथियारों की संख्या में नहीं है।
होर्मुज में किसी सैन्य अभियान का मतलब संभावित रूप से समुद्री सुरक्षा, हवाई निगरानी, तटीय मिसाइल खतरे, ड्रोन, माइनिंग और क्षेत्रीय सैन्य प्रतिक्रिया जैसे कई जोखिमों से एक साथ निपटना होगा। ऐसे वातावरण में किसी जहाज को एक बार सुरक्षित निकाल देना और हजारों जहाजों के लिए लगातार सुरक्षित समुद्री गलियारा बनाए रखना दो बिल्कुल अलग सैन्य समस्याएं हैं।
ट्रंप की रणनीति पर भी सवाल
क्षेत्रीय स्रोत ने यह भी दावा किया है कि इस रणनीतिक गतिरोध से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निराश हैं और प्रशासन के सैन्य तथा राजनीतिक स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रहे हैं। स्रोत ने इसे ईरान के खिलाफ आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दबाव की व्यापक रणनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि सैन्य लक्ष्यों में कठिनाई के बीच आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है।
इस हिस्से को भी फिलहाल स्रोत का आकलन ही माना जाना चाहिए। ट्रंप प्रशासन के भीतर कथित तौर पर किस स्तर पर मतभेद या जिम्मेदारी तय करने की कोशिश चल रही है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती।
ईरान की ताकत का असली आधार
होर्मुज में ईरान की संभावित बढ़त केवल उसके हथियारों पर निर्भर नहीं करती। यहां भूगोल खुद एक रणनीतिक संसाधन बन जाता है। ईरानी तट जलमार्ग के बेहद करीब है, जबकि समुद्री यातायात के लिए उपलब्ध मार्ग सीमित हैं। ऐसी स्थिति में अपेक्षाकृत कम लागत वाले असममित साधन भी किसी अत्यधिक महंगे नौसैनिक अभियान के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं।
यही वह बिंदु है जहां आधुनिक युद्ध का पुराना समीकरण बदलता दिखाई देता है। अत्याधुनिक विमानवाहक पोत और मिसाइल प्रणालियां किसी इलाके में भारी सैन्य शक्ति तो उपलब्ध करा सकती हैं, लेकिन वे हर संभावित खतरे को शून्य नहीं कर देतीं। खासकर तब, जब विरोधी के पास भौगोलिक निकटता और असममित युद्ध क्षमता दोनों हों।
ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
होर्मुज की असुरक्षा का सबसे बड़ा प्रभाव युद्धक्षेत्र से बाहर दिखाई दे सकता है। यदि जहाजों के लिए जोखिम बढ़ता है, तो केवल तेल की उपलब्धता ही मुद्दा नहीं बनती। शिपिंग बीमा महंगा हो सकता है, जहाजों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं और ऊर्जा बाजार भविष्य की आपूर्ति को लेकर जोखिम का अतिरिक्त प्रीमियम जोड़ सकते हैं।
इसलिए होर्मुज का सवाल अमेरिकी-ईरानी सैन्य टकराव से कहीं बड़ा है। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है। किसी भी लंबे व्यवधान की कीमत अंततः ईंधन, परिवहन, उद्योग और उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच सकती है।
ईरान का दावा और IRGC की चेतावनी
ईरान का रुख इससे बिल्कुल अलग है। तेहरान का कहना है कि जलमार्ग की सुरक्षा और सामान्य आवाजाही युद्ध की समाप्ति तथा उसकी शर्तों के स्वीकार किए जाने से जुड़ी है। ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि वह किसी नए हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।
ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने सोमवार को जारी बयान में अपनी सैन्य तैयारी दोहराई और कहा कि उसकी सेनाएं देश की क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध क्षमताओं का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर बातचीत में कोई निर्णायक प्रगति सामने नहीं आई है।
असली सवाल सैन्य जीत से आगे का है
होर्मुज में चुनौती यह नहीं है कि कौन ज्यादा शक्तिशाली हथियार रखता है। असली चुनौती यह है कि कौन उस शक्ति को लगातार, नियंत्रित और राजनीतिक रूप से टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल कर सकता है।
अगर अमेरिका वास्तव में इस जलमार्ग को सुरक्षित रखने की ऐसी योजना नहीं बना पा रहा है जिसकी विश्वसनीय गारंटी दी जा सके, तो यह सैन्य क्षमता से ज्यादा रणनीतिक विकल्पों की समस्या होगी। और अगर दूसरी तरफ ईरान सीमित भौगोलिक क्षेत्र का इस्तेमाल करके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर जोखिम पैदा करने की क्षमता बनाए रखता है, तो यह असममित शक्ति का वही रूप है जिसमें छोटी जगह का रणनीतिक महत्व पूरे युद्धक्षेत्र से बड़ा हो जाता है।
