अक्टूबर से आएंगी 100% इथेनॉल कारें, 25 रुपये लीटर खर्च का दावा

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और वैकल्पिक ईंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने से कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां 100 फीसदी इथेनॉल (Ethanol) से चलने वाली कारें लॉन्च करने जा रही हैं। गडकरी के मुताबिक, फ्लेक्स इंजन वाली इन कारों के आने से ईंधन का खर्च काफी कम हो जाएगा और यह पेट्रोल के मुकाबले करीब 25 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बैठेगा।

खुद इस्तेमाल कर रहे 100 फीसदी इथेनॉल वाली कार

देश में वाहनों की बढ़ती संख्या का जिक्र करते हुए गडकरी ने बताया कि वर्तमान में भारत की सड़कों पर 4 करोड़ कारें और 20 करोड़ दोपहिया वाहन दौड़ रहे हैं। उन्होंने अपनी टोयोटा इनोवा कार का उदाहरण देते हुए कहा कि वह गाड़ी 100 फीसदी इथेनॉल पर चलती है। मंत्री ने दावा किया कि अगर पेट्रोल से इसकी तुलना की जाए, तो ईंधन की लागत 25 रुपये प्रति लीटर आती है।

टाटा, मारुति सुजुकी और महिंद्रा उतारेंगी फ्लेक्स इंजन गाड़ियां

केंद्रीय मंत्री ने ऐलान किया कि अगले महीने से टाटा, मारुति सुजुकी, टोयोटा और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियां 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स इंजन के साथ अपनी गाड़ियां बाजार में पेश करेंगी। उन्होंने बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने की नीति लागू कर दी है। अमेरिका और जर्मनी समेत दुनिया के 19 देशों में यह व्यवस्था पहले से लागू है।

आयात बिल घटेगा, मक्के की कीमत में आया उछाल

इथेनॉल नीति के आर्थिक फायदों पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि इस कदम से देश का 22 लाख करोड़ रुपये का ईंधन आयात बिल कम होगा, जिसका सीधा फायदा गांवों के किसानों और मजदूरों को मिलेगा।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जब सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की खरीद शुरू की थी, तब मक्के की कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी। मांग बढ़ने से अब किसानों को इसका मूल्य 3,600 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर से जीरो हुआ तेल का बिल

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती स्वीकार्यता पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बस, कार और स्कूटर अब आम हो चुके हैं। उन्होंने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने पहली बार इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाई थी, तो एक पत्रकार ने पूछा था कि अगर गाड़ी बीच रास्ते में बंद हो गई, तो क्या वह उसे धक्का लगाने आएंगे।

गडकरी ने बताया कि आज उनके अपने खेतों में पांच इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर काम कर रहे हैं। ये ट्रैक्टर केवल डेढ़ घंटे में फुल चार्ज हो जाते हैं और 8 घंटे तक चलते हैं। इससे उनके खेतों में तेल का खर्च पूरी तरह से शून्य हो गया है।

उन्होंने आगे बताया कि वे खुद एक हाइड्रोजन कार का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी से बनने वाले इस ईंधन की तकनीक को बढ़ावा देते हुए सरकार आने वाले समय में देश में हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक भी शुरू करने की योजना बना रही है।