10 दिन, 6 देश और अरब सागर में US Carrier; CENTCOM चीफ के दौरे से क्या संकेत?

6amsu4vs_sukhbir-singh-badal-attack-_625x300_13_August_26

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर का मध्य-पूर्व का 10 दिन का दौरा 15 अगस्त को खत्म हो गया। इस दौरान उन्होंने बहरीन, इराक, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। छह देशों की इस यात्रा के साथ कूपर अरब सागर में तैनात अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर भी पहुंचे। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब मध्य-पूर्व में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैन्यकर्मी अलग-अलग अभियानों में तैनात हैं।

कूपर ने यात्रा के दौरान संबंधित देशों के वरिष्ठ असैन्य और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों से भी मुलाकात की और कई सैन्यकर्मियों को उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। यात्रा का एक अहम पड़ाव जॉर्डन रहा, जहां 11 अगस्त को कंबाइंड जॉइंट टास्क फोर्स-ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के कमांड में बदलाव हुआ।

जॉर्डन में बदली कमान

जॉर्डन में आयोजित समारोह में मेजर जनरल केविन लैम्बर्ट ने टास्क फोर्स की कमान रियर एडमिरल लियाम हुलिन को सौंप दी। कूपर इस बदलाव के दौरान मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने अपनी यात्रा में दोबारा नियुक्ति लेने वाले अमेरिकी सैनिकों और बेहतर प्रदर्शन करने वाले सैन्यकर्मियों से भी मुलाकात की।

कूपर की यात्रा का सैन्य पहलू यहीं तक सीमित नहीं रहा। अरब सागर में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन तक उनका पहुंचना इस दौरे का एक प्रमुख हिस्सा रहा। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात नाविकों और मरीन से मुलाकात की और कई जूनियर सैन्यकर्मियों को सम्मानित किया।

USS Abraham Lincoln पर दूसरी बार पहुंचे कूपर

इस साल कूपर की यूएसएस अब्राहम लिंकन की यह दूसरी यात्रा थी। इससे पहले फरवरी में भी वह इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर पहुंचे थे। उस समय उनके साथ अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी मौजूद थे।

इस बार कूपर ने कैरियर के क्रू के काम की सराहना की। उन्होंने लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ऐसे अमेरिकी सैन्य दल के रूप में बताया, जिसने अपनी जिम्मेदारियों को लेकर मजबूत प्रदर्शन किया है। कूपर ने कैरियर की मौजूदा तैनाती को आधुनिक दौर की सबसे ज्यादा operationally intense और महत्वपूर्ण deployments में से एक बताया।

नवंबर में निकला था, जनवरी में पहुंचा

यूएसएस अब्राहम लिंकन सैन डिएगो में आधारित है। यह पिछले साल नवंबर में deployment के लिए रवाना हुआ था और जनवरी में मध्य-पूर्व पहुंचा। इसके बाद से कैरियर स्ट्राइक ग्रुप क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियों का हिस्सा रहा है।

CENTCOM के अनुसार इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने हजारों combat flights संचालित की हैं। इन उड़ानों को Operation Epic Fury, क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों और ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के समर्थन से जोड़ा गया है।

यही वह बिंदु है जहां कूपर की यात्रा और अमेरिकी सैन्य तैनाती एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई देती हैं। एक तरफ CENTCOM प्रमुख छह देशों में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर रहे थे, दूसरी तरफ उनकी यात्रा का हिस्सा उस एयरक्राफ्ट कैरियर तक पहुंचना था जो क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी सैन्य अभियानों में शामिल रहा है।

मध्य-पूर्व में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

इस समय मध्य-पूर्व में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैन्यकर्मी अलग-अलग मिशनों पर तैनात हैं। कूपर ने अपने दौरे में इन्हीं सैनिकों के बीच जाकर उनकी गतिविधियों और प्रदर्शन को देखा तथा कई सैनिकों को सम्मानित किया।

यह आंकड़ा इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के पैमाने को बताता है। लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कूपर का यह दौरा किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा है। दी गई जानकारी में ऐसी कोई घोषणा नहीं है।

इतना जरूर है कि छह देशों की यात्रा, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात और अरब सागर में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन का निरीक्षण—इन तीनों गतिविधियों ने कूपर के दौरे को केवल औपचारिक यात्रा से कहीं अधिक व्यापक सैन्य engagement बना दिया।

अब नजर अमेरिकी सैन्य तैनाती पर

कूपर का 10 दिन का दौरा समाप्त हो चुका है, लेकिन जिस सैन्य तंत्र के बीच यह यात्रा हुई, वह अभी सक्रिय है। मध्य-पूर्व में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती के दौरान हजारों combat flights संचालित किए जा चुके हैं।

कूपर की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसलिए छह देशों की संख्या नहीं, बल्कि उस व्यापक सैन्य गतिविधि का निरीक्षण है जिसके बीच CENTCOM का नेतृत्व काम कर रहा है। अरब सागर में एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी और ईरान से जुड़े अमेरिकी नौसैनिक अभियान इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बनाते हैं।

कूपर लौट चुके हैं, लेकिन अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वहीं है। अब इस तैनाती और अभियानों की अगली दिशा ही यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व का सैन्य समीकरण किस ओर बढ़ता है।