संजय निषाद का BJP पर निशाना, निषादों के लिए SC कोटे की मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद ने निषाद समाज के आरक्षण को लेकर भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है। NDTV से बातचीत में उन्होंने मांग की कि निषाद समाज को OBC से हटाकर अनुसूचित जाति (SC) में शामिल किया जाए। उन्होंने OBC के 27 फीसदी आरक्षण में से 9 फीसदी कोटा SC आरक्षण में देने की बात भी कही।
संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज लंबे समय से आरक्षण के मुद्दे पर संघर्ष कर रहा है। उनका दावा है कि वह इसी मांग को लेकर भाजपा के साथ आए थे, लेकिन पार्टी की सरकार बनने के बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा और बसपा की सरकारों ने भी निषाद समाज के साथ न्याय नहीं किया और अब भाजपा भी इस मामले में पहल नहीं कर रही है।
OBC के 27 फीसदी कोटे पर भी उठाए सवाल
संजय निषाद ने OBC आरक्षण के बंटवारे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि 27 फीसदी OBC कोटे का 99 फीसदी हिस्सा एक ही जाति के लोगों के पास है। उनका कहना था कि आरक्षण में कोटा होना चाहिए, ताकि अलग-अलग पिछड़ी जातियों को उनके हिस्से का लाभ मिल सके।
निषाद ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर ही उनका भाजपा के साथ गठबंधन हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में आरक्षण और संविधान के नाम पर 43 सीटें गंवाईं। उनके मुताबिक, भाजपा ने सत्ता में आने से पहले निषाद समाज को SC आरक्षण देने की बात कही थी, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में अब तक फैसला नहीं हुआ।
BJP को दी सत्ता से बाहर होने की चेतावनी
आरक्षण के मुद्दे पर संजय निषाद ने भाजपा को चेतावनी भी दी। उन्होंने खुद को निषाद आंदोलन का नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने लगातार अपने समाज की आवाज उठाई है।
उनका कहना था कि कांग्रेस, सपा और बसपा को सत्ता से बाहर होने की वजहों में आरक्षण से जुड़ा असंतोष भी शामिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति की कई जातियों को OBC में डालकर उनके अधिकारों को नुकसान पहुंचाया गया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भाजपा के साथ कोई राजनीतिक डील करना चाहते हैं, तो संजय निषाद ने कहा कि उनका समाज गरीब जरूर है, लेकिन वफादार है। इसी दौरान उन्होंने निषाद राज और भगवान राम का संदर्भ देते हुए अपने समुदाय की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया।
‘यूपी में 14 लाख आरक्षित पद’
संजय निषाद ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के आंकड़ों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 28 लाख नौकरियां हैं, जिनमें 14 लाख पद आरक्षित हैं। उनके मुताबिक, इनमें 7 लाख नौकरियां ‘साइकिल वालों’ यानी सपा समर्थक सामाजिक समूहों और 6.5 लाख ‘हाथी वालों’ यानी बसपा से जुड़े सामाजिक समूहों के पास हैं। बाकी करीब 50 हजार पद अन्य जातियों के हिस्से में हैं।
ये आंकड़े संजय निषाद ने अपने बयान में बताए हैं। उपलब्ध इनपुट में इन आंकड़ों का कोई स्वतंत्र सरकारी स्रोत या दस्तावेज नहीं दिया गया है।
निषाद ने महिलाओं और सवर्ण वर्ग के लिए आरक्षण का जिक्र करते हुए सवाल किया कि निषाद समाज को उसका अधिकार कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण की मांग उनके लिए राजनीतिक सौदेबाजी नहीं, बल्कि अधिकार का मुद्दा है।
योगी को बताया मार्गदर्शक, BJP से रिश्ते पर क्या कहा?
भाजपा पर हमलावर रुख के बावजूद संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना मार्गदर्शक और पूजनीय बताया। जब उनसे पूछा गया कि अगर निषाद समाज को आरक्षण देने का फैसला नहीं हुआ तो क्या वह भाजपा का साथ छोड़ देंगे, उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर उनकी पार्टी स्वतंत्र है।
उनका यह बयान भाजपा के साथ गठबंधन के भीतर आरक्षण के सवाल को लेकर उनकी स्थिति को साफ करता है। संजय निषाद लगातार इस मांग को लेकर अपनी पार्टी की राजनीतिक भूमिका पर जोर देते रहे हैं।
उन्होंने अपनी रैलियों और संगठन की ताकत का भी जिक्र किया। कहा कि उनकी रैलियों में लोग पैसे देकर नहीं लाए जाते, बल्कि खुद आते हैं। उन्होंने निषाद समाज की सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल उठाते हुए कहा कि उनका समुदाय अभी भी आर्थिक रूप से कमजोर है और बड़ी संख्या में लोग झोपड़ियों में रहते हैं।
‘हम आरक्षण की भीख नहीं मांग रहे’
संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज आरक्षण की भीख नहीं मांग रहा, बल्कि अपना हक मांग रहा है। उन्होंने अपने समुदाय के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि निषाद समाज ने देश के लिए संघर्ष किया है।
बात को राजनीतिक चेतावनी तक ले जाते हुए उन्होंने कहा कि अगर देश में गद्दार होंगे तो उनका समाज उनसे भी लड़ेगा। साथ ही उन्होंने भाजपा संगठन में निषाद समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि भाजपा की राष्ट्रीय टीम में भी निषाद समाज के नेता को जगह मिलनी चाहिए।
मार्च में भी आरक्षण पर दे चुके हैं अल्टीमेटम
आरक्षण को लेकर संजय निषाद इससे पहले भी अपनी सरकार और गठबंधन सहयोगी भाजपा पर दबाव बनाते रहे हैं। मार्च में एक रैली के दौरान वह मंच पर भावुक हो गए थे और उन्होंने कहा था कि अगर आरक्षण की मांग पूरी नहीं हुई तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे।
उस दौरान उन्होंने निषाद समाज के वोट लिए जाने और समाज की महिलाओं तथा बेटियों की गरिमा से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे। ताजा बयान में भी उन्होंने आरक्षण को अपने राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख मुद्दा बताया है।
